हाईकोर्ट ने पूर्व वित्त मंत्री अब्दुल रहीम राथर के बेटे हिलाल राथर की जमानत अर्जी फिर खारिज कर दी है। पिछले दो महीने में राथर को चार बार जमानत देने से इंकार कर दिया गया है। जेएंडके बैंक से 177 करोड़ रुपये का लोन लेकर धोखाधड़ी करने के आरोपी हिलाल के मामले की जांच सीबीआई कर रही है। इससे पहले यह मामला एंटी करप्शन ब्यूरो के पास था। शुक्रवार को जस्टिस पुनित गुप्ता ने जमानत अर्जी पर सुनवाई की।
इससे पहले जस्टिस पुनित गुप्ता ने आरोपी की ओर से एडवोकेट सुनील सेठी और प्रणव कोहली और सीबीआई की ओर से एडवोकेट मोनिका कोहली की दलीलें सुनीं। जज ने पाया कि आरोपी पर बहुत ही गंभीर मामला दर्ज है। आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती। जरूरी नहीं कि जमानत के लिए दावा करना आरोपी का अधिकार ही हो। हर एक मामले का निर्णय उसके मेरिट के आधार पर होता है।
कहा कि किस व्यक्ति पर किस तरह का केस है, उसके आधार पर ही उसे जमानत दी जाती है। आरोपी की जमानत अर्जी पर सीबीआई ने अपना पक्ष रखा कि आरोपी ने बैंक से 177 करोड़ रुपये लिए। यह पैसा अपने निजी स्वार्थ के लिए लिया गया। इस मामले की जांच अभी जारी है और पूरी नहीं हुई।
आरोपी कई बार कोशिश कर चुका है कि उसे जमानत मिले। पीजीआई, जीएमसी सहित अन्य जगहों पर आरोपी को बेहतर इलाज दिया गया। जेल में भी उसके स्वास्थ्य का ख्याल रखा जा रहा है। रिकॉर्ड में कहीं नहीं है कि जेल में हिलाल के लिए रहने का माहौल स्वच्छ नहीं है। ऐसे में फिर क्यों वह कोविड 19 का हवाला देकर जमानत मांग रहा है।