पिछले वर्ष जिन हाथों में चूड़ियां खनक रही थीं, इस बार उनमें ग्लूकोज की ड्रिप लगी है। यह दास्तान है दर्शना की। पिछली बार जिस मांग में सिंदूर भरकर पति की लंबी उम्र के लिए करवाचौथ का व्रत रखा था, इस बार वह सूनी है।
पाक की नापाक करतूत की वजह से उसका पति अब इस दुनिया में नहीं है। जम्मू मेडिकल कालेज के डिजास्टर वार्ड में जख्मों का इलाज करवा रही अरनियां के महाशे दे कोठे गांव की दर्शना के दिल पर जो जख्म लगे हैं, उसका इलाज किसी डाक्टर के पास नहीं है।
रविवार की रात को हुई गोलाबारी में उसके पति पुरुषोत्तम और 15 वर्षीय बेटी काजल की मौत हो गई। बेटा मनीष जिंदगी और मौत से लड़ रहा है। खुद दर्शना भी गंभीर घायल हैं। उनकी बड़ी जेठानी और भतीजे राजेश की भी गोलाबारी से मौत हो चुकी है।
कुल मिलाकर पाकिस्तान की नापाक हरकत की वजह से इस परिवार के चार सदस्य गोलाबारी की भेंट चढ़ चुके हैं। दर्शना का दर्द, उसके अपनों के खोने की पीड़ा पर हर किसी की आंखें नम हो जाती हैं। उसके लिए अब करवाचौथ ही नहीं, दीपावली, भैया दूज, राखी, होली जैसे त्योहार बेमायने हो गए हैं।
घरों की जगह रिलीफ कैंपों में रखेंगी सुहागिनें व्रत
रानी देवी हर साल पति की कुशलता के लिए करवाचौथ का व्रत रखती थीं। इसके वह कई दिनों पहले तैयारियां शुरू कर देती थीं। लेकिन इस बार वह थोड़ी मायूस हैं। न तो उन्होंने करवाचौथ की खरीदारी की है न ही सजने-संवरने की तैयारी की है। सीमांत क्षेत्र में गोलाबारी होने के कारण वह परिवार के साथ शिविर में है। इस बार वह शिविर में ही व्रत रखेंगी और पति की कुशलता की कामना करेंगी।
रानी देवी की तरह सीमांत क्षेत्रों की अन्य सुहागिनों की तरफ से भी इस बार सिर्फ व्रत की रस्म अदायगी ही की जाएगी। पड़ोसी मुल्क की नापाक करतूत के कारण सुहागिनें घरों से नहीं बल्कि शरणार्थी शिविरों से चांद को अर्घ्य देंगी। सीमांत गांव सूने पड़े हैं। बाजारों में भी कोई रौनक और चहल-पहल नहीं है। करवाचौथ की पूर्व संध्या पर एक-दूसरे के घर सरगी देने की परंपरा भी इस बार टूट गई है।
इस दिन जमकर खरीदारी करने वाली महिलाएं इस बार अपने लिए न तो सूट सिलवा पाई हैं न ही चूड़ियां खरीद सकी हैं। महिलाओं के चेहरों पर मायूसी साफ दिखाई पड़ती है। त्योहार पर घरों में पकवान बनाकर खुशियां बांटने की जगह प्रशासन की तरफ से खाने की व्यवस्था पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है।
सीमांत क्षेत्रों में फीकी रहेगी करवाचौथ
अरनिया, सलैड, बिशनाह, आरएसपुरा, खौड के बाजारों में गोलाबारी के कारण इस बार रौनक में कमी आई है। करवाचौथ के दो दिन पहले से ही बाजारों में मेंहदी लगाने वाले स्टाल लगा लेते हैं।
इस बार बाजारों में वह इक्का-दुक्का ही दिख रहे। चूड़ियों से सजी दुकानों पर भी वह चहल-पहल नहीं दिखाई दी। घरों को ताले लगाकर राहत कैंपों में जान बचाने के लिये बैठे लोगों के दिलों में मोर्टार गोलों का भय अभी बना हुआ है।
जो परिवार घर छोड़कर नहीं आए हैं, उनकी महिलाएं भी छत पर चांद को अर्घ्य देने के बजाय बंद किवाड़ों से ही पूजा को प्राथमिकता देंगी। सुरक्षा बलों द्वारा भी रात के समय लोगों को घरों से बाहर निकलने नहीं दिया जा रहा है। पूजा का दीया भी लोगों के लिए मुसीबत न खड़ी कर दे, इसका खास ध्यान दिया जा रहा है।