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Jammu News: आंखों के सामने उजड़ी थी गृहस्थी, बादल गरजते ही बढ़ जाती है धड़कन

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- शाम होते-होते डूब गया था जम्मू शहर : लोगों ने छतों पर काटी थी रात
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- बीते साल 26 अगस्त की भयावह बाढ़ के जख्म आज तक नहीं भरे

निखिल मेहता
जम्मू। 26 अगस्त 2025, मंगलवार की शाम आंखों के सामने गृहस्थी उजड़ रही थी। एक-एक सीढ़ी चढ़ता तवी का पानी आशियाने निगल रहा था। आज भी बादलों की गरजना से धड़कन तेज हो जाती है। यह कहना है कैनाल रोड की उर्वशी का... लगभग एक साल पहले जम्मू में सैकड़ों परिवारों के लिए 26 अगस्त की शाम कभी न भूलने वाली त्रासदी बन गई। सुबह से लगातार मूसलाधार बारिश ने शाम तक ऐसा कहर बरपाया कि शहर के कई हिस्से जलमग्न हो गए। देखते ही देखते कैनाल रोड, राजेंद्र नगर, राजीव कालॉनी, नानक नगर, संजय नगर, पीरखो, गुज्जर नगर, बेलीचराना और तवी नदी से सटे अन्य इलाकों में पानी भर गया। चारों ओर चीख-पुकार और तबाही का ऐसा मंजर था कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।

एहतियात के तौर पर पूरे शहर की बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई। मोबाइल नेटवर्क भी प्रभावित होने लगा। कई जगह सड़कें जलमग्न हो गईं, वाहन पानी में फंस गए। लोगों के सामने घरों की छतों पर शरण लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। तवी के उफान ने गुज्जर नगर, बेलीचराना और चौथे पुल के आसपास भारी तबाही मचाई। पुल से जुड़ी सड़क का एक बड़ा हिस्सा बह जाने से दहशत और बढ़ गई।
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राजिंद्र नगर निवासी विकास बताते हैं कि सुबह की बारिश सामान्य थी। सब रोजमर्रा को कामों में जुटे थे। शाम करीब साढ़े चार से पांच बजे के बीच अचानक पानी घरों में घुसना शुरू हो गया। मात्र आधे घंटे में पूरे मोहल्ले में पांच से छह फुट तक पानी भर गया। कई परिवार सामान तक सुरक्षित स्थान पर नहीं पहुंचा सके। प्रशासन की राहत टीमें पहुंचीं लेकिन आधा शहर संकट में होने से हर जगह तुरंत सहायता पहुंचाना संभव नहीं था।
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संजय नगर निवासी संजीव का कहना है कि बरसात में बाढ़ अब लगभग हर साल की समस्या बनती जा रही है। इसके बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। राजीव नगर निवासी सुशील कहते हैं कि तवी नदी के किनारे बसी उनकी कॉलोनी में उस दिन का मंजर आज भी रूह कंपा देता है। तेज बारिश, तवी की गरजती लहरें और तेजी से बढ़ता जलस्तर किसी भयावह सपने से कम नहीं था। नदी किनारे सीढ़ियां और रास्ते क्षतिग्रस्त हो गए। कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। हालांकि किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई लेकिन आर्थिक नुकसान इतना अधिक था कि कई परिवारों का जीवन आज तक पटरी पर नहीं लौटा है।
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