जन्नत-ए-कश्मीर को भविष्य में बाढ़ से बचाने की कवायद तेज की गई है। झेलम नदी (फेस 1) में बाढ़ प्रबंधन प्रोग्राम के तहत 401 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट मंजूर किए गए हैं। दीर्घकाल में सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने जिला पुलवामा के डोगरीपोरा से वुल्लर लेक तक वैकल्पिक फ्लड स्पिल चैनल के लिए 2083 करोड़ रुपया का प्रस्ताव भी दिया है।
जलस्रोतों पर संसदीय स्टेंडिंग कमेटी की हाल ही में कश्मीर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के बाद भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए राज्य सरकार के साथ लघु और लंबी योजनाओं पर मजबूत रणनीति बनाने पर काम किया जा रहा है। इस कमेटी में सांसद तारिक हमीद करा भी शामिल हैं।
कमेटी के समक्ष सदस्यों द्वारा रखी गई रिपोर्ट में बाढ़ प्रबंधन प्रोग्राम के फेस 1 में झेलम में पानी को लेने की 28000 क्यूसिक क्षमता को बढ़ाकर 50000 तक करना है। इसमें सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के साथ अन्य दूसरी एजेंसियां काम करेंगी। झेलम को दोनों ओर से सुरक्षित बांधने के साथ अतिक्रमण को हटाया जाएगा।
बाढ़ को रोकने के लिए वैकल्पिक चैनलों के निर्माण पर काम किया जाएगा। इस दौरान संसदीय कमेटी ने वांगीपुरा (सुंबल), बेमिना, शरीफाबाद, पादशाही बाग, खुरसू, राजबाग, शिवपोरा सहित अन्य इलाकों का दौरा किया। सदस्यों ने झेलम के क्षतिग्रस्त हिस्सों का भी बारीकी से मुआयना किया।
पिछले साल सितंबर माह में आई भीषण बाढ़ में श्रीनगर शहर के अलावा कश्मीर के कई हिस्सों में भारी जानमाल का नुकसान हुआ था। इसमें झेलम से निकले पानी ने तबाही मचाई थी। हूकुम सिंह (सांसद) की अध्यक्षता में आई संसदीय कमेटी में राधेश्याम बयास, सुखवीर सिंह, विनोद कुमार, मुरली मोहन मगानती आदि शामिल रहे।