कश्मीर में बाढ़ से पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग (पीएचई) विभाग के ढांचे को करीब 162.85 करोड़ का नुकसान हुआ है। पीएचई विभाग कश्मीर के चीफ इंजीनियर एएम लंकर के अनुसार 1938 पेयजल आपूर्ति योजनाओं में से 1321 पेयजल योजनाओं के ढांचे को भारी क्षति पहुंची है।
चीफ इंजीनियर के अनुसार पेयजल आपूर्ति योजनाओं की स्थायी बहाली के लिए करीब 162.85 करोड़ की राशि की दरकार है। क्षति ग्रस्त ढांचे को बहाल करने का काम युद्ध स्तर पर जारी रखा गया है और करीब 1222 योजनाओं को आंशिक रूप से बहाल कर दिया गया है।
श्रीनगर शहर में छह मुख्य फिल्ट्रेशन प्लांटों में से चार बाढ़ के पानी में डूबने की वजह से उनके ढांचे और मशीनरी को काफी नुकसान पहुंचा है। विभाग की ओर से कड़ी मशक्कत के बाद दूध गंगा स्टेशन से पेयजल आपूर्ति को बहाल किया गया है। जबकि प्रभावित इलाकों में लोगों को राहत प्रदान करने के लिए 20 पानी के टैंकरों से पेयजल की आपूर्ति की जा रही है।
केंद्र सरकार ने भी 5000 लीटर की क्षमता के तीन आरओ मुहैया करवाएं हुए है। इन्हें कुरूसो राजबाग, महजूर नगर और तंगपोरा में स्थापित किया गया यहां पर पाईपों से पेयजल आपूर्ति फिलहाल संभव नहीं हो पा रही है।
श्मीर घाटी के सभी मुख्य शहरों जिसमें सोपोर, बिजबिहाड़ा, अवंतीपोरा, शोपियां, कुपवाड़ा, चदपोरा में भी पेयजल ढांचे को क्षति पहुंची है। युद्ध स्तर पर मरम्मत कार्य जारी रखा गया है और प्रभावित इलाकों में टैंकरों के माध्यम से पानी की सप्लाई की जा रही है।