जम्मू-कश्मीर में आई बाढ़ से केवल सिविल एरिया को ही नुकसान नहीं पहुंचा है। सेना को भी बाढ़ के कारण भारी नुकसान झेलना पड़ा है। कश्मीर घाटी में आई बाढ़ में 70 सैन्य शिविर, बंकर और सेना के प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचा है।
हालांकि सुरक्षा बलों ने तत्काल सतर्कता बरतते हुए क्षतिग्रस्त स्थानों को बदला और संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। बाढ़ से अग्रिम चौकियों को भी नुकसान पहुंचा लेकिन सेना ने अपने जवानों को सकुशल बाहर निकाल लिया।
आतंकियों को रोकने वाली पोस्ट क्षतिग्रस्त
एक वरिष्ठ सैन्य अफसर का कहना है कि घाटी में 30-40 कैंप, पोस्ट, बंकर क्षतिग्रस्त हुए हैं, जो मुख्य रूप से आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए बनाए गए थे।
लाइन आफ कंट्रोल (एलओसी) पर 30 चौकियां बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई हैं, जबकि दस से 15 बंकर बाढ़ में ध्वस्त हो गए लेकिन सेना ने तत्काल हरकत में आते हुए तमाम चौकियों और बंकरों को फिर से सक्रिय कर लिया।
खासकर एलओसी पर किसी तरह का गैप नहीं छोड़ा गया है। सैन्य अफसर के अनुसार बाढ़ में सेना ने तीन जवान गंवाए हैं। पुलवामा में बोट बहने से दो और पुंछ में पस्सियां गिरने से एक जवान की मौत हुई। उनके शव भी बरामद कर लिए गए।
गोला बारूद का भी हुआ नुकसान
इतना ही नहीं बाढ़ में सेना के गोला बारूद के दो छोटे स्टोर प्रभावित हुए हैं। इससे सेना को थोड़ा नुकसान हुआ है। घाटी में सेना दोहरी भूमिका अदा कर रही है। एक ओर प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने का काम चल रहा है, दूसरी ओर एलओसी पर जवान किसी भी तरह की घुसपैठ को रोकने के लिए 24 घंटे तैयार हैं। ढाई लाख बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के अलावा उन्हें खाने-पीने और कपड़े और टेंट मुहैया करवाए गए। बाढ़ के दौरान ही घुसपैठ करने वाले दस आतंकियों को भी सेना ने मार गिराया है।
एजेंसी