- बनतालाब से लोअर रूपनगर तक निर्माण में देरी, बारिश में घरों में घुसा गंदा पानी
- विधायकों ने बजट आवंटन में देरी और प्रशासनिक लापरवाही को ठहराया जिम्मेदार
अंकित कुमार मिश्र
जम्मू। शहरवासियों को जलभराव से राहत दिलाने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से बनाए जा रहे नाले ही अब लोगों की परेशानी का कारण बन रहे हैं। 11 अक्तूबर को हुई बारिश ने अधूरे निर्माण कार्यों की पोल खोल दी।
बनतालाब के ठठर, राजिंदर नगर, कृष्णा नगर और लोअर रूपनगर के सरिका विहार में नालों का निर्माण पूरा नहीं होने से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। कहीं घरों में गंदा पानी घुसा तो कहीं आवाजाही प्रभावित हुई। ठठर में निर्माण के दौरान पुल का हिस्सा गिरने से एक मजदूर की मौत भी हो चुकी है। इसके बावजूद परियोजनाएं अधूरी हैं।
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हादसे के बाद भी अधूरा पुल
बनतालाब के ठठर में नाले की सुरक्षा दीवार का निर्माण अप्रैल 2026 में शुरू हुआ था। एक मई को निर्माण के दौरान पुल का हिस्सा ढहने से चार मजदूर चपेट में आ गए थे, जिनमें एक की मौत हो गई थी। करीब छह महीने बाद 10 अक्तूबर को उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी और विधायक शाम लाल शर्मा की मौजूदगी में 3.50 करोड़ रुपये की लागत से पुल के पुनर्निर्माण का शुभारंभ किया गया। हालांकि, निर्माण पूरा नहीं होने से 11 अक्तूबर की बारिश में पानी की निकासी प्रभावित हुई।
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10 हजार आबादी को राहत का इंतजार
वार्ड 19 के राजिंदर नगर में 3.50 करोड़ रुपये की लागत से नाले का निर्माण सितंबर 2026 में शुरू हुआ। काम अधूरा होने के कारण बारिश के दौरान सैकड़ों घरों में गंदा पानी घुसने की समस्या बनी हुई है। इससे करीब 10 हजार की आबादी प्रभावित होती है। स्थानीय लोगों को अब भी जलभराव की समस्या से स्थायी राहत मिलने का इंतजार है।
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कृष्णा नगर और सरिका विहार में भी अधूरे नाले
वार्ड 12 के कृष्णा नगर और लोअर रूपनगर के सरिका विहार में पांच-पांच करोड़ रुपये की लागत से नालों का निर्माण कराया जा रहा है। दोनों जगह काम अधूरा है। कृष्णा नगर में निर्माण 20 मई 2026 को शुरू हुआ था, जबकि वार्ड 66 के सरिका विहार में भी इसी माह काम शुरू किया गया। बारिश के बाद सरिका विहार में आवाजाही प्रभावित हुई और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
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नालोंं की सफाई पर खर्च हुए हैं एक करोड़
नगर निगम के जोन-वन के सीटीओ रंजन शर्मा और जोन-टू के सीटीओ बलकार सिंह ने बताया कि मानसून से पहले अप्रैल, मई और जून में शहर के नालों की व्यापक स्तर पर सफाई कराई गई थी। कुछ जगहों पर आंशिक मरम्मत कार्य भी हुआ था। इस पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च हुए थे। लेेकिन मौजूदा हालत को देख लगता ही नहीं है कि नालोंं की तल्लीदार सफाई हुई थी। अगर हकीकत मेंं काम ईमानदारी से हुआ रहता रविवार को हुई बारिश में पूरा शहर डूबता नहीं।
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विधायकों ने अधिकारियों के माथे पर फोड़ा ठीकरा
जम्मू पूर्व के विधायक युद्धवीर सेठी, पश्चिम के अरविंद गुप्ता, उत्तर के शाम लाल शर्मा और बाहु के विधायक विक्रम रंधावा ने निर्माण कार्यों में देरी के लिए समय पर बजट आवंटित नहीं होने और प्रशासनिक लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये की परियोजनाएं अधर में लटकी हैं, लेकिन काम पूरा होने की समयसीमा को लेकर अधिकारियों के पास स्पष्ट जवाब नहीं है। विधायकों के अनुसार, शहर में अभी करीब 20 फीसदी नालों का निर्माण पूरा हुआ है, जबकि 80 फीसदी काम अधूरा है। बरसात के दौरान परेशानी बढ़ने पर लोगों की नाराजगी जनप्रतिनिधियों को झेलनी पड़ती है।
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बाढ़ प्रभावित इलाकों में 200 करोड़ खर्च करने का दावा
नगर निगम ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में मरम्मत कार्यों के लिए 200 करोड़ रुपये खर्च करने का दावा किया है। माैजूदा हालात ये हैं कि यह राशि कहां लगाई गई, इसका कोई असर नहीं दिख रहा है।