डोडा जिले के चार एसपीओ को 2009 में सेवा से हटाने के आदेश को किया रद्द
नई जांच के आधार पर चार सप्ताह के भीतर फिर से सेवा बहाल करने के निर्देश
जम्मू। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में डोडा जिले के चार स्पेशल पुलिस ऑफिसर्स (एसपीओ) को 2009 में सेवा से हटाने के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि बगैर नोटिस और सुनवाई का मौका दिए बिना गलत व्यवहार के आरोपों के आधार पर सेवा से हटाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
जस्टिस मोक्षा खजूरिया काजमी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे नई जांच के नतीजे के आधार पर याचिकाकर्ताओं को चार सप्ताह के भीतर फिर से सेवा में बहाल करें। कहा कि इनसे जुड़े कोई भी लाभ जांच के नतीजों पर निर्भर करेंगे। जसवंत सिंह, शक्ति कुमार, कुलवंत सिंह और उत्तम सिंह को 10 सितंबर, 2009 के सेवा से हटाने के आदेश को रद्द करते हुए कोर्ट ने उनकी याचिका को मंजूर किया। कहा कि हालांकि एसपीओ को अस्थायी आधार पर नियुक्त किया जाता है और सेवा में बने रहने का उनका कोई पक्का अधिकार नहीं होता, लेकिन गलत व्यवहार के आरोपों पर उन्हें सेवा से हटाने को अस्थायी नियुक्ति की सामान्य समाप्ति नहीं माना जा सकता। जेएनएफ
यह था मामला...
मामला 15 अगस्त, 2009 की एक घटना से शुरू हुआ था। याचिकाकर्ता स्वतंत्रता दिवस की ड्यूटी से लौट रहे थे और कथित तौर पर उग्रवादियों की गोलीबारी की चपेट में आ गए। याचिकाकर्ताओं के अनुसार उन्होंने अपने सर्विस हथियारों से जवाबी कार्रवाई की, जिसके दौरान एसपीओ जसवंत सिंह को गोली लग गई। हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने इस बात को नहीं माना और दावा किया कि चोट सर्विस हथियारों की अनधिकृत अदला-बदली और गलत तरीके से इस्तेमाल के कारण गलती से चली गोली से लगी थी। अधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि याचिकाकर्ताओं ने विभागीय कार्रवाई से बचने के लिए घटना को उग्रवादी हमले के तौर पर पेश करने की कोशिश की थी। नतीजतन चारों एसपीओ को सेवा से हटा दिया गया।