जीएमसी में पहला आइसोलेशन यूनिट स्थापित किया जाएगा। हर साल बढ़ रही स्वाइन फ्लू, इबोला जैसी बीमारियों से पीड़ितों को यूनिट में उचित इलाज दिया जाएगा। इसमें आधुनिक लैबोरेटरी स्थापित की जाएगी। एक छोटा आईसीयू का निर्माण होगा।
इसके अलावा दूसरे राज्यों का रुख करने वाले मरीजों को यहीं पर अन्य आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं मरीजों को मिल सकेंगी। उल्लेखनीय है कि गठबंधन सरकार की कबीना की पहली बैठक में जीएमसी में 6 करोड़ 30 लाख रुपये की लागत से आइसोलेशन यूनिट बनाने की मंजूरी दी गई है।
जीएमसी के प्रिंसिपल डा. घनश्याम देव गुप्ता का कहना है कि नए आइसोलेशन यूनिट से संभाग के दस जिलों के लोगों को सीधा लाभ मिल सकेगा। इस प्रोजेक्ट में 2.98 करोड़ रुपये का वातानुकूलित आइसोलेशन वार्ड बनाया जाएगा। वार्ड में 15-16 कैबिन अटैच बाथरूम के साथ होंगे।
गंभीर मरीजों को तत्काल आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए छोटा आईसीयू बनेगा। दो वेंटिलेटर स्थापित किए जाएंगे। डायग्नोस्टिक लैब का निर्माण किया जाएगा। अभी तक स्वाइन फ्लू और दूसरे वार्न बीमारियों के लिए टेस्टिंग को दूसरे राज्यों में सैंपल भेजे जा रहे हैं।
इसमें रिपोर्टिंग में भी थोड़ी देर होती है, लेकिन जीएमसी में टेस्टिंग लैब के खुल जाने पर मरीजों को सारी सुविधाएं यहीं मिल सकेंगी। इस लैब की खासियत यह होगी कि यहीं पर अधिकांश बीमारियों के सैंपलों की टेस्टिंग की जाएगी।
इस यूनिट का मुख्य काम संक्रमित बीमारियों के पीड़ितों को उचित इलाज देना होगा। इस यूनिट का जीएमसी के ओल्ड ड्रग स्टोर की करीब 12000 हजार स्क्वेयर फीट जगह पर निर्माण किया जाएगा।
सरकार से फंड जारी होने पर शीघ्र प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया जाएगा, जिससे अगले वित्त वर्ष में मरीजों को उचित इलाज के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा।