सांबा। इन दिनों खेतों में गेहूं की फसल तैयार खड़ी है। क्षेत्र में कंबाइन मशीन के देरी से पहुंचने से आग की घटनाओं से किसानों की चिंता बढ़ गई है। सांबा में अप्रैल में ही खेतों में आग लगने की सात घटनाएं हो चुकी हैं। इसमें किसानों की 317 कनाल गेहूं की फसल जलकर राख हो चुकी है।
10 अप्रैल को सनूरा, रंधवाल, छन्न गुडडेयां में 30 कनाल, 12 अप्रैल को कौलपुर में 35 कनाल, 13 अप्रैल को दनेई गांव में 20 कनाल, 14 अप्रैल को रैपर पंचायत में 30 कनाल, सदोह पंचायत में 50 कनाल, 16 अप्रैल को चक दुल्मा पंचायत में 84 कनाल, 17 अप्रैल को मनोहर गोपाला में 30 कनाल, 24 अप्रैल को तालूर में 8 कनाल, रैका लुबाना में 60 कनाल, 25 अप्रैल को कालीबडी में 35 कनाल गेहूं की फसल जल कर राख हो गई व एक किसान का शेड भी आग की भेंट चढ़ गया। यही नहीं प्रत्येक वर्ष आग की घटनाएं हो रही हैं। जिला प्रशासन की ओर से भी किसानों को उचित मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में किसान काफी परेशानी में रहते हैं। किसानों के अनुसार प्रशासन को कई बार सूचना देने पर भी कोई मदद नहीं मिलती है। बिजली की ढीली तारें हादसे का कारण बन रही हैं। 20 से 25 वर्षों से तारें नहीं बदली गई हैं। थोड़ी सी हवा चलने पर तारें टकराती हैं तो आग लग जाती है। उन्होंने उपराज्यपाल से अपील की है कि बिजली ढांचे को दुरुस्त किया जाए। ताकि हर वर्ष किसानों की फसल को आग से बचाया जा सके।