एक खेत में आग से आसपास के खेतों की भी जल रही नाड़, पशुचारे का पैदा हो रहा संकट
अरनिया। क्षेत्र में गेहूं की कटाई का काम लगभग पूरा हो चुका है। वहीं, खेत में गेहूं की नाड़ की साफ सफाई के लिए शरारती तत्व नाड़ को आग लगा रहे हैं। यह किसानों और भूसा बनाने वाले कारीगरों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
पिछले 15 दिन से क्षेत्र में गेहूं की फसल की कटाई का कार्य चल रहा है, जो लगभग मुकम्मल हो चुका है। मगर शरारती तत्वों के गेहूं के नाड़ की सफाई के लिए आग लगाने से किसानों के खेतों में मोटर पंप, भूसा, बिजली की तार जलने के मामले सामने आ रहे हैं। इसको लेकर किसान और भूसा बनाने वाले कारीगर काफी चिंतित हैं। कंबाइन मशीन से गेहूं की कटाई के बाद बचे हुए नाड़ से रीपर मशीन से जानवरों के लिए भूसा बनाया जाता है। मगर खेतों में जल्दी आग लगने के चलते भूसा बनाने वाले कारीगर भी चिंतित हैं। उन्होंने बताया कि गेहूं की कटाई के बाद 10 से 15 दिन तक भूसा बनाने का कार्य चलता रहता है। मगर खेतों में आग लगने से भूसा बनाने का कार्य बिल्कुल खत्म हो चुका है। उन्होंने बताया कि किसी एक खेत में आग लगने से पूरे क्षेत्र में आग फैल जाती है। जो खेत में बिछे हुए गेहूं के नाड़ को चपेट में ले लेती है। इसके बाद भूसा बनाने का कार्य खत्म हो जाता है। वहीं दूसरी ओर शरारती तत्वों के खिलाफ पुलिस में सूचना दी जाती है। पुलिस उनको हिरासत में लेकर पूछताछ की जाती है। मगर उचित तौर पर सबूत न मिलने से उनको छोड़ दिया जाता है। क्षेत्र में मंगलवार को कठार, जब्बोवाल, व्यासपुर, अरनिया के इर्द-गिर्द गांव में गेहूं के नाड़ में आग लगने के मामले सामने आए हैं। जबोवाल खेतों में आग लगने के मामले में पुलिस ने एक युवक को हिरासत में लिया है। बाद में पुलिस ने चेतावनी देकर उसे छोड़ दिया है। पुलिस ने बताया कि गेहूं की फसल कटाई का कार्य पूरे होने तक खेतों में आग न लगाई जाए। भूसा बनाने वाले कारीगरों ने बताया कि पूरा साल में गेहूं की कटाई के बाद ही भूसा बनाकर अपने परिवार का निर्वाह करते हैं। मगर इसके लिए भी उन्हें वंचित रहना पड़ रहा है।