जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सोशल मीडिया पर भ्रामक और गलत सूचना फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का फैसला लिया है और ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर अराजकता या दुष्प्रचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जम्मू-कश्मीर में सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर गलत और भ्रामक सूचनाएं फैलाने वालों पर प्रशासन की नजर रहेगी। भ्रामक सूचना साझा करने वालों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की जाएगी। डीसी ने स्पष्ट कर दिया है कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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हाल में विधानसभा सत्र के दौरान केंद्र शासित प्रदेश में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और सरकारी नीतियों के खिलाफ दुष्प्रचार करने का मुद्दा गरमाया रहा। इसके बाद प्रशासन ने बेहद सख्त रुख अपना लिया है। डीसी राकेश मिन्हास ने आदेश जारी करते हुए सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और सरकारी नीतियों के खिलाफ दुष्प्रचार करने वालों से सख्ती से निपटने का आदेश जारी किया। बता दें कि सदन में चर्चा के तुरंत बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन और पुलिस मुख्यालय ने संयुक्त रूप से कड़े कदम उठाने के निर्देश जारी किए थे।
डीसी ने बताया कि प्रशासन का मानना है कि इस तरह की भ्रामक सूचनाएं न केवल सरकारी काम में बाधा डालती हैं, बल्कि युवाओं को गुमराह करने का काम करती है। ऐसी अफवाहें सुरक्षा के लिहाज से भी घातक साबित हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में शांति और विकास की गति को बनाए रखने के लिए डिजिटल अनुशासन अनिवार्य किया गया है।
24 घंटे होगी निगरानी
साइबर सेल अब सोशल प्लेटफार्म मीडिया हैंडल्स की निगरानी करेगा। व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप के एडमिन को अपने ग्रुप में साझा होने वाली किसी भी आपत्तिजनक सामग्री के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया जाएगा।