लेह के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति के बाद वीरवार को पुलिस ने भाजपा नेता और एमएलसी विक्रम रंधावा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। उन पर आरोप है कि संसदीय चुनाव को प्रभावित करने के लिए पार्टी ने एक कार्यक्रम के बाद कुछ पत्रकारों को रिश्वत की पेशकश की थी। हालांकि, रंधावा ने आरोपों को निराधार बताया और कहा कि कांग्रेस भाजपा की छवि खराब करने की कोशिश कर रही है।
लेह की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुन शुक्ला ने बताया कि घटना को लेकर रणबीर पैनल कोड (आरपीसी) की धारा 171ई (रिश्वतखोरी) और 171एफ (अनुचित प्रभाव डालने की कोशिश) के तहत मामला दर्ज किया गया और जांच शुरू कर दी गई है।
एफआईआर में केवल एमएलसी विक्रम रंधावा का ही नाम
बुधवार को लेह पुलिस को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू करने के निर्देश दिए थे। दूसरी तरफ एमएलसी विक्रम रंधावा का कहना है कि उन पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। कश्मीर में भाजपा विरोधी तत्वों और पार्टी की छवि खराब करने के लिए कांग्रेस की तरफ से इसका समर्थन किया गया है। एक सीसीटीवी फुटेज के सामने आने के बाद रंधावा ने दावा किया कि लिफाफे में 4 मई को केंद्रीय रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के लेह की यात्रा की कवरेज के लिए संवाददाताओं के निमंत्रण थे। एमएलसी ने कहा कि कुछ मीडिया कर्मियों ने लिफाफे खोले और उन्हें लौटा दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें विशेष निमंत्रण की आवश्यकता नहीं है क्योंकि वे पहले से ही मंत्री की यात्रा को कवर कर रहे हैं।
रैना ने किया जांच का समर्थन
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रवींद्र रैना ने मामले की जांच का समर्थन करते हुए कहा कि अगर पत्रकारों का आरोप सही हैं तो उन्होंने वहीं पर लिफाफे खोल कर नोट क्यों नहीं दिखाए, उनके पास तो कैमरे भी थे। उन्होंने कहा कि चार मई को सोशल मीडिया पर भाजपा को बदनाम करने की सोची समझी साजिश के रूप में इस सबको मामले को उछाला गया। उन्होंने दावा किया कि लेह प्रेस क्लब के उपाध्यक्ष ताशी टुंडप ने कहा है कि प्रेस क्लब की आड़ में वह किसी भी सियासी रैली में शामिल नहीं रहे हैं। भाजपा नेताओं के खिलाफ शिकायत पत्र में हस्ताक्षर से भी उन्होंने खुद को अलग किया है। रैना का कहना है कि सियासी साजिश के तहत भाजपा नेताओं को बदनाम करने का प्रयास किया गया है और जल्द ही साजिश का खुलासा हो जाएगा। कोर्ट में अवमानना याचिका जल्द ही दायर की जाएगी।