अखनूर के चौकी चौरा का जंगल सोमवार को तेंदुओं की दहाड़ से दहल उठा। हवाओं को चीरती दहाड़ गांवों में लोगों के घरों में घुसने लगी। डरे ग्रामीण घरों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पाए।
करीब चार घंटे तक जगह दहलते रहे। इसके बाद आवाजें एकदम खामोशी हो गईं। कुछ लोगों ने हिम्मत कर बाहर निकल कर जो दृश्य देखा तो वह स्तब्ध रह गए। खून से लथपथ एक तेंदुआ तड़प रहा था। दरअसल, एक तेंदुआ अपना इलाका छोड़ कर दूसरे तेंदुए की हद में घुस गया था। इस तेंदुए की यह हरकत दूसरे तेंदुए को नागवार गुजरी। इसके बाद दोनों में जंग शुरू हो गई। दोनों तेंदुए करीब चार घंटे तक लड़ते रहे। वह भी तब तक जब एक बुरी तरह से लहूलुहान होकर गिर नहीं गया।
लोगों का कहना है कि दोनों तेंदुए आपस में भयानक तरीके से लड़ रहे थे। दोनों की दहाड़ इतनी थी कि कोई पास जाने की हिम्मत नहीं कर रहा था। लोगों ने चौकी चौरा पुलिस को इस घटना की जानकारी दी। पुलिस ने वन्यजीव विभाग को सूचित किया।
जम्मू से वन्यजीव विभाग की टीम मौके पर पहुंची और घायल तेंदुए को कब्जे में लिया। इसके बाद उसे जम्मू के मांडा डियर पार्क में लाया गया। यहां उसका उपचार किया गया। वन्यजीव विशेषज्ञ एवं वन्यजीव वार्डन अमित शर्मा का कहना है कि तेंदुए के ठीक होने के बाद उसे वापस उसी जंगल में छोड़ दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि तेंदुओं में जब हद पार करने पर लड़ाई लगती है तो वह बुरी तरह से भिड़ते हैं। आमतौर पर तेंदुए की दहाड़ तब सुनाई देती है, जब वह किसी मानव पर हमला करता है। यहां लंबे समय बाद तेंदुओं की आपस में लड़ाई हुई है।