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आजादी के बाद जम्मू नगर निगम में 5वीं बार पड़ेंगे वोट, 13 साल बाद हो रहे हैं चुनाव

Fri, 28 Sep 2018 04:32 PM IST
सतीश वालिया, जम्मू
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- फोटो : Demo Pic
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नगर निगम जम्मू और श्रीनगर के पांचवीं बार हो रहे चुनाव में मतदान करने को लेकर लोगों में काफी उत्साह है। इससे पहले चार बार नगर निगम के चुनाव हो चुके हैं। इस दौरान चुनाव लंबे-लंबे अंतराल में करवाए गए हैं। आजादी के बाद सबसे पहले नगर निगम के चुनाव 1956 में हुए थे। इस दौरान नगर निगम के अध्यक्ष का चयन किया था। 1972 में 16 साल बाद लोगों ने चुनाव में दोबारा भाग लिया था। इस दौरान निगम ने बजट के अभाव के बावजूद शहर में रास्तों पर पत्थर बिछाकर चलने योग्य बनाया। आठ साल बाद फिर 1980 में चुनाव हुए थे। इस दौरान भी विकास कार्य बजट के अभाव में सिरे नहीं चढ़ पाए। लोगों को स्ट्रीट लाइट की सुविधाएं भी मोहल्ले में नहीं मिल पाई थीं।
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इसके बाद कश्मीर घाटी में आतंकवाद चरम पर पहुंच गया और 1980 के बाद चुनाव नहीं हो पाए। चुनाव नहीं होने का सीधा असर शहर के होने वाले विकास कार्यों पर पड़ा। धीरे-धीरे हालात बदले तो वर्ष 2005 में एक बार फिर चुनाव कराए गए। इसबार जम्मू नगर निगम ने चरणबद्ध ढंग से रास्तों पर टाइलें, स्ट्रीट लाइट, सफाई व्यवस्था को क्रमबद्ध करने का काम किया। 2005 के बाद अब 13 साल बाद फिर एक बार चुनाव हो रहे हैं। लोग अपने पार्षदों का चयन करेंगे।

लार्ड रिपिन ने 1886 में की थी नगर निगम की स्थापना
1886 में नगर निगम जम्मू, श्रीनगर नगरपालिका की स्थापना लार्ड रिपनन के जमाने में हुई की। इसके बाद उन्होंने नगर पालिका एरिया में काफी सुधार किया।

पहले मुबारक मंडी में होता था एमसी कार्यालय
आजादी से पहले और बाद में मुबारक मंडी में नगर निगम का कार्यालय चलता था। यहां से शहर के विकास के लिए योजनाएं बनाई जाती थीं।

चुनाव से पहले बढ़ा नगर निगम का दायरा
2005 के चुनाव से पहले नगर निगम के 23 वार्ड थे। चुनाव के दौरान वार्र्डों की संख्या 71 हुई। अब 75 तक पहुंच गई है।
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कभी आतंकवाद तो कभी नेताओं की बेरुखी बनी चुनाव में रोड़ा

इस रियासत में आतंकवाद ने विकास कार्यों को बुरी तरह प्रभावित किया है। इसके चलते कई बार परिस्थितियां ऐसी बनीं कि नगर निगम चुनाव नियमित रूप से नहीं हो पाए। कई बार नेताओं की बेरुखी ने भी लोगों को इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया से महरूम रखा
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