अदालत ने बेटी के इसी चश्मदीद बयान को मुख्य आधार मानते हुए दोषी पिता को जीवनभर जेल में रहने की सजा सुनाई। जम्मू के प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रणबीर सिंह जसरोटिया ने दोषी शाम लाल को रणबीर दंड संहिता यानी आरपीसी की धारा 302 के तहत सजा सुनाने के साथ ही 10 हजार का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना न देने पर तीन माह की साधारण कैद भुगतनी होगी।
अदालत ने गौर किया कि अनीता ने स्पष्ट रूप से शाम लाल को अपने पिता और भूरी बाई को मां के रूप में पहचाना। अनीता ने साफ शब्दों में कहा कि मेरी मां की हत्या मेरे पिता ने की थी। उसने बताया कि माता-पिता के बीच झगड़ा हुआ था और घटना के वक्त मेरे दो भाई भी कमरे में मौजूद थे।
कोर्ट ने बेटी की कमरे में मौजूदगी को स्वाभाविक मानते हुए कहा कि जिरह के दौरान ऐसी कोई ठोस बात सामने नहीं आई, जिससे यह लगे कि एक कम उम्र की बेटी अपनी मां की हत्या के लिए अपने ही पिता को झूठा फंसाएगी। कोर्ट ने माना कि अपराध की परिस्थितियां निस्संदेह गंभीर थीं, क्योंकि पीड़िता दोषी की पत्नी थी। पाया कि हमला जानबूझकर और हत्या करने के इरादे से किया गया था।
सुनवाई के दौरान कई गवाह पलटे
ट्रायल के दौरान मृतका के कई रिश्तेदार अपने बयान से पलट गए, लेकिन कोर्ट ने माना कि इससे केस कमजोर नहीं होता, क्योंकि उनमें से कोई भी कमरे के अंदर हमले का चश्मदीद गवाह नहीं था। कहा कि गवाह पूरी तरह से विश्वसनीय हो, तो केवल एक चश्मदीद की गवाही के आधार पर भी दोष सिद्धि हो सकती है। अभियोजन को अपराध साबित करने के लिए उचित संदेह से परे सबूत देने होते हैं। बेटी के बयान को मेडिकल सबूतों से भी समर्थन मिला।
यह है मामला
वर्ष 2014 का यह मामला छन्नी हिम्मत पुलिस स्टेशन में दर्ज है। इलाके के प्लॉट नंबर 14, सेक्टर 5 निवासी शाम लाल की पत्नी भूरी बाई की हत्या की सूचना मिली। हत्या 23 और 24 मार्च, 2014 की रात हुई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भूरी बाई के शरीर पर कई चोटें पाई गईं, जिनमें गर्दन पर खरोंच और चोट के निशान थे। पेट में एक गहरा घाव था जिससे लिवर और खून की नसें डैमेज हो गई थीं। पेट में करीब दो लीटर खून के थक्के पाए गए। आरोपी के शरीर पर भी खरोंच के निशान थे। मेडिकल ऑफिसर की राय थी कि मौत दो वजहों से हुई है। पहली गला घोंटने से दम घुटने के कारण और दूसरे किसी नुकीले हथियार से लिवर में चोट लगने के कारण हुए हैमरेजिक शॉक (खून बहने से सदमा) के मिले-जुले असर से।