जम्मू। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते कहा कि छेड़छाड़ के हर मामले को दुष्कर्म की कोशिश नहीं माना जा सकता। यह अहम टिप्पणी प्रिजाइडिंग ऑफिसर अमरजीत सिंह लंगेह ने एक मामले की सुनवाई के दौरान की है। अभियोजन पक्ष के अनुसार लीविंग सर्टिफिकेट लेने पीड़िता स्कूल गई थी। आरोपी राकेश ने रास्ते में उसे रोका और मोबाइल छीन लिया। इसके बाद छेड़छाड़ की। पीड़िता की ओर से बाल पकड़ने और थप्पड़ मारने पर आरोपी भाग गया।
सरकारी पक्ष ने भी माना कि रिकॉर्ड में ऐसा पर्याप्त आधार नहीं है जिससे प्रथम दृष्टया दुष्कर्म की कोशिश का मामला साबित हो सके। अदालत ने पीड़िता के बयान और केस रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि आरोपी ने ऐसा कोई कदम उठाया जिससे यह माना जाए कि वह दुष्कर्म को अंजाम देने वाला था। जांच एजेंसी मोबाइल बरामद नहीं कर सकी और न ही नष्ट किए जाने या गायब करने से जुड़े सबूत पेश किए गए। अदालत ने आरोपी को आरोप मुक्त कर दिया। केस को सुनवाई के लिए अखनूर की न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत भेज दिया गया। सभी पक्षों को तीन जून को अदालत में पेश होने के निर्देश दिए गए हैं। जेएनएफ