पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष डॉ फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच जब भी तनाव हुआ है, दर्द सरहद ने ही सहा है।इंटरनेशनल बॉर्डर से लेकर एलओसी से सटे लोगाें को दो मुल्कों में टकराव का खामियाजा भुगतना पड़ा है। बिना वक्त गंवाए भारत और पाकिस्तान को संवाद के चैनल खोलने होंगे।
डॉ फारूक ने कहा एक दूसरे के खिलाफ दुशमनी का भावना रखकर किसी का भला नहीं हुआ है। पहले भी जब कहीं ऐसे हालात बने हैं, नुकसान ही झेलना पड़ा है। हालात सामान्य कर दोनों मुल्काें को वर्ष 2003 में घोषित संघर्ष विराम का पालन करना होगा।
उन्हाेंने कहा लाहौर घोषणा, आगरा शिखर सम्मेलन सहित अन्य द्विपक्षीय राजनयिक प्रक्रियाओं पर ध्यान देना होगा। वर्ष 2015 में ही भारत और पाकिस्तान ने मिलकर साझेदारी पर जोर दिया था।