इस मामले को लेकर पीडीपी नेता व पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि जेके क्रिकेट घोटाला एक पुराना मामला है। इसकी काफी समय से जांच चल रही है। ईडी ने फारूक से उस समय पूछताछ की है जब जम्मू-कश्मीर की मुख्यधारा की पार्टियां सामूहिक रूप से अपनी विशिष्ट पहचान की रक्षा के लिए खड़ी हैं।
अगली स्लाइड में पढ़िए आखिर क्या है पूरा मामला...
श्रीनगर की चीफ जुडिशल मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत के सामने सीबीआई ने सोमवार को जेकेसीए (जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन) के करोड़ों के घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला सहित चार आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पेश की गई। मिली जानकारी के अनुसार आठ हजार पन्नों की चार्जशीट में डॉ. फारूक आरोपियों की सूची में चौथे स्थान पर हैं और आरोपियों के खिलाफ आरपीसी की धारा 120-बी, 406 और 409 के तहत आरोप लगाए गए हैं।
मिली जानकारी के अनुसार सीबीआई ने उस समय रहे जेकेसीए अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला, मोहम्मद सलीम खान (उस समय रहे जनरल सेक्टरी), एहसान अहमद मिर्जा (उस समय के खजांची) और बशीर अहमद मिसगर (जम्मू कश्मीर बैंक में एग्जीक्यूटिव) के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र और विश्वास के आपराधिक उल्लंघन के आरोप लगाए हैं।
माजिद अहमद डार जोकि कश्मीर के एक क्रिकेट खिलाड़ी रहे हैं और साथ ही रणजी ट्रॉफी के लिए कोच और सिलेक्टर के रूप में भी काम कर चुके हैं। उन्होंने वर्ष 2015 में जेकेसीए घोटाले को लेकर पीआईएल दर्ज की थी। सीबीआई द्वारा पेश की गई चार्जशीट के बाद माजिद ने कहा कि वह सीबीआई का शुक्रिया करना चाहते हैं।
यह क्रिकेट की जीत है, मैंने किसी शक्स के खिलाफ नहीं बल्कि घोटाले के खिलाफ पीआईएल दर्ज की थी। उन्होंने उम्मीद जताई कि अब कानून इसमें सही फैसला लेगा। उन्होंने कहा कि पुलिस मामले की जांच कर रही थी और इसमें काफी समय लगने के बाद मैंने हाईकोर्ट में पीआईएल दायर की और तेजी से जांच की मांग की।
गौरतलब है कि गत गुरुवार को श्रीनगर की स्थानीय अदालत ने सीबीआई द्वारा पेश की गई चार्जशीट को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था क्योंकि जांच टीम नामित समय पर सुनवाई पर पहुंचने में असफल रही थी। बता दें कि बीसीसीआई ने राज्य में क्रिकेट सुविधाओं के विकास के लिए 2002 से 2011 के बीच जेकेसीए को 112 करोड़ रुपये दिए और एजेंसी ने आरोप लगाया है कि इसमें 43.69 करोड़ का आरोपियों द्वारा दुरुपयोग किया गया था।