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जम्मू-कश्मीर में निशुल्क एंबुलेंस सेवा 15 अक्तूबर से, जल्द बजेगी 102-108 टोल फ्री नंबर पर घंटी

Wed, 31 Jul 2019 02:15 AM IST
Pranjal Dixit न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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सांकेतिक तस्वीर
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श्रीनगर में मंगलवार को राज्यपाल सत्यपाल मलिक की अध्यक्षता में हुई राज्य प्रशासनिक परिषद (एसएसी) की बैठक में राज्य में 102-108 टोल फ्री एंबुलेंस सेवा के संचालन को मंजूरी दी गई। यह एंबुलेंस सेवा रोगियों को तत्काल चिकित्सा देखभाल, विशेष रूप से महत्वपूर्ण, ट्रॉमा, आकस्मिक पीड़ितों, गर्भवती महिलाओं और बीमार बच्चों के लिए चौबीस घंटे परिवहन प्रदान करेगी। इस एंबुलेंस सेवा को 15 अक्तूबर 2019 को शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य के दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों में कीमती जिंदगियों को बचाने में यह एंबुलेंस सेवा वरदान साबित होगी। 
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इसके लिए राज्य सरकार 416 एंबुलेंस लाएगी, जो चौबीस घंटे एक केंद्रीकृत कॉल सेंटर के माध्यम से संचालित होंगी। 102 एंबुलेंस सेवा लक्षित आबादी (गर्भवती महिलाओं, बीमार बच्चों आदि) को मुफ्त सेवा प्रदान करेगी। किसी भी परिस्थिति में परिवहन सेवा प्रदान करने के लिए किसी भी लक्षित लाभार्थी से कोई उपयोगक्ता शुल्क नहीं लिया जाएगा। 108 एंबुलेंस सेवा मुख्य रूप से एक आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली है, जिसे मुख्य रूप से महत्वपूर्ण देखभाल, आपात और दुर्घटना पीड़ितों आदि के रोगियों में भाग लेने के लिए डिजाइन किया गया है। दोनों नंबर की एंबुलेंस के लिए श्रीनगर और जम्मू में एक-एक काल सेंटर स्थापित होंगे। 

कॉल सेंटरों की सेवाओं को आउटसोर्स किया जाएगा, जिसके लिए जेके मेडिकल सप्लाइज कारपोरेशन लिमिटेड ने निविदाएं मंगाई थीं और रेट कॉन्ट्रैक्ट को अंतिम रूप दिया जा रहा है। परियोजना की परिचालन लागत सालाना 69.40 करोड़ रुपये अनुमानित की गई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत अनुमोदन और वित्त पोषण के लिए भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को ’लेटर ऑफ  इंटेंट (एलओआई)’ और आवश्यक बजट की पुष्टि की गई है।

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नए मेडिकल कालेजों को प्रशासनिक नियंत्रण को मंजूरी 

राज्यपाल सत्यपाल मलिक की अध्यक्षता में हुई राज्य प्रशासनिक परिषद (एसएसी) की बैठक में अनंतनाग, बारामूला, डोडा, कठुआ और राजोरी के पांच नए सरकारी मेडिकल कालेजों को क्रमश: अनंतनाग, बारामूला, डोडा, कठुआ और राजोरी के जिला अस्पतालों (एसोसिएटेड हॉस्पिटल्स) उनकी संपत्ति के प्रशासनिक नियंत्रण के हस्तांतरण के लिए मंजूरी दी गई। एसएसी ने पीएचसी सगाम और पीएचसी मट्टन के प्रशासनिक नियंत्रण को जीएमसी अनंतनाग, पीएचसी कलंत्र और पीएचसी बाग-ए-इस्लाम को जीएमसी बारामूला, पीएचसी मंजाकोट और शहरी स्वास्थ्य इकाई को जीएमसी राजोरी, पीएचसी भल्ला और पीएचसी घाट को जीएमसी डोडा और पीएचसी बुद्धि और शहरी स्वास्थ्य केंद्र कृष्णा कालोनी से जीएमसी कठुआ के प्रशासनिक हस्तांतरण को मंजूरी दी।

एसएसी ने इन पांच अस्पतालों के विभिन्न श्रेणियों के 674 पदों और पांच ग्रामीण स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्रों और 107 शहरी स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्रों के 107 पदों के हस्तांतरण को भी मंजूरी दी, जो वर्तमान में अपने बजट प्रावधानों के साथ संबंधित चिकित्सा कालेजों में स्वास्थ्य विभाग की स्थापना के लिए सृजित हुए हैं। भारत सरकार की ओर से जम्मू-कश्मीर में अनंतनाग, बारामूला, डोडा, कठुआ और राजोरी में 189 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से नए मेडिकल कालेज बनाए जा रहे हैं। इनमें चार नए मेडिकल  कालेजों में एमबीबीएस के पहले बैच के लिए कक्षाएं अगस्त, 2019 से शुरू की जा रही है। जीएमसी डोडा में एमबीबीएस के पहले बैच की शुरुआत के लिए मेडिकल काउंसिल ऑफ  इंडिया से अनुमति लेने का प्रयास किया जा रहा है। प्रत्येक नए मेडिकल कॉलेज के लिए विभिन्न श्रेणियों के 675 पद सृजित किए गए हैं।

 
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राज्य भर में 6 जीएमसी के लिए नियमित प्रिंसिपल

राज्यपाल सत्य पाल मलिक की अध्यक्षता में हुई राज्य प्रशासनिक परिषद (एसएसी) की बैठक में राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर और राजौरी, अनंतनाग, बारामूला, डोडा, कठुआ के पांच जीएमसी के लिए नियमित आधार पर प्रिंसिपलों की नियुक्ति को मंजूरी दी। एसएसी ने डॉ. परवेज अहमद शाह (प्रोफेसर) को प्रिंसिपल जीएमसी श्रीनगर के रूप में पहली जुलाई से प्रभावी नियुक्ति की मंजूरी दी। इससे पहले डॉ. परवेज अहमद शाह को 30 जून से प्रभावी अपने कतज़्व्यों के अलावा जीएमसी श्रीनगर के प्रिंसिपल के पद का कार्यभार सौंपा गया था। डॉ. शौकत अहमद (प्रोफेसर) को प्रिंसिपल जीएमसी अनंतनाग के रूप में 4 जुलाई 2018 से, डॉ अब्दुल हामिद कथू (प्रोफेसर) को प्रिंसिपल जीएमसी बारामुला के साथ 1 अगस्त 2018 से, डॉ तारिक परवेज आज़ाद (प्रोफेसर) को प्रिंसिपल जीएमसी डोडा 06 जुलाई 2018 से, डॉ कुलदीप सिंह (प्रोफेसर) को प्रिंसिपल जीएमसी, राजौरी 26 अप्रैल से प्रभावी और डॉ सुलेमान चैधरी (प्रोफेसर) प्रिंसिपल जीएमसी कठुआ के रूप में संभावित रूप से नियुक्ति की मंजूरी दे दी। डॉ. जावेद चैधरी के नियमितीकरण को मंजूरी दी।


बीओपीपीई के माध्यम से होगा नर्सिंग, पैरामेडिकल, बी फार्मेसी में दाखिला

राज्यपाल सत्य पाल मलिक की अध्यक्षता में हुई राज्य प्रशासनिक परिषद (एसएसी) की बैठक में बीएसी नर्सिंग/पोस्ट बीएससी नर्सिंग, पैरामेडिकल और बी फार्मेसी पाठ्यक्रमों में व्यावसायिक प्रवेश परीक्षा बोर्ड (बीओपीपीई) के मध्यम से ही दाखिले होंगे। अब प्रवेश के लिए योग्यता आधारित चयनों को मंजूरी दी गई है। विभिन्न पैरा-मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए योग्यता विज्ञान के साथ बाहरवीं है। महिला बहुउद्देश्यीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता (एफ एमपीएचडव्ल्यू) और पुरुष बहुउद्देश्यीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता (एमएमपीएचडव्ल्यू) के लिए योग्यता मैट्रिक है। जीएनएम पाठ्यक्रम वाले उम्मीदवार पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग भी कर सकते हैं। विभिन्न पैरा-मेडिकल पाठ्यक्रमों के लिए उम्मीदवारों का चयन बाहरवीं परीक्षा में और मैट्रिक परीक्षा (एफ एमपीएचडब्ल्यू और एमएमपीएचडब्ल्यू के लिए) उम्मीदवारों द्वारा प्राप्त योग्यता के आधार पर किया जा रहा है। स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग ने बीओपीपीई के माध्यम से आयोजित की जाने वाली योग्यता आधारित चयन प्रक्रिया के माध्यम से एमएससी/बीएससी नर्सिंग, पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग और विभिन्न पैरा-मेडिकल पाठ्यक्रमों के साथ-साथ बी फार्मेसी में प्रवेश को केंद्रीकृत करने का प्रस्ताव रखा। यह निर्णय विभिन्न पैरामेडिकल, नर्सिंग और बी फार्मेसी पाठ्यक्रमों के लिए उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया को कारगर बनाने में मदद करेगा। 
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