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आतंकी के बेटे को अब्दुल्ला ने दिलवाया था मेडिकल में दाखिला

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हाल ही में पूर्व रॉ प्रमुख एएस दुलत द्वारा अपनी किताब में किए गए जा रहे खुलासों से दिल्ली ही नहीं बल्कि जम्मू कश्मीर की राजनीति में हलचल मचा दी है। अब एएस दुलत हिज्बुल मुजाहिदीन के स्वयंभू प्रमुख सैयद सलाउद्दीन से जुड़ा एक बड़ा खुलासा किया है।
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दौलत ने अपनी किताब 'कश्मीर: द वाजयेयी ईयर्स' में एक जगह लिखा है 1990 में हिज्बुल मुजाहिदीन के स्वयंभू प्रमुख सैयद सलाउद्दीन ने अपने बेटे को मेडिकल में सीट दिलवाने के लिए स्थानीय आईबी चीफ की मदद ली थी और उनके कहने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने सलाहुद दीन के बेटे को सीट दी थी। दुलत ने किताब में दावा किया है आतंकियों से समर्पण कराने के लिए हमेश से ही इस तरह की मदद की जाती रही है।

आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन ने भी सलाहुद्दीन द्वारा स्थानीय आईबी चीफ केएम सिंह से मदद लेने के दुलत के दावे को नकार दिया। हिजबुल की ओर से दुलत के दावे को झूठ करार देते हुए कहा है कि सलाहुद्दीन के बेटे को किसी की मदद से मेडिकल सीट नहीं मिली थी, बल्कि उसने अपनी काबलियत के दम पर सीट निकाली थी।
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हुर्रियत ने दुलत के दावे को नकारा

अलगाववादी संगठन हुर्रियत कांफ्रेंस और आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन ने पूर्व रॉ प्रमुख एएस दुलत के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। दुलत ने अपनी किताब में दावा किया था कि कश्मीर में अलगाववादियों का कोई आधार नहीं है।

साथ ही उन्होंने किताब में लिखा है कि मीरवाइज उमर फारूक को मुख्यधारा में लाकर चुनाव लड़ाया जा सकता है। पर मीरवाइज को अपनी जान जाने का खतरा है।

हुर्रियत प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा कि हुर्रियत का मकसद सिर्फ और सिर्फ अवाम की राय के मुताबिक कश्मीर समस्या का समाधान कराना है।
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