जम्मू-कश्मीर में नेकां प्रधान व सांसद डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि नवनिर्वाचित लद्दाख डिवीजन में कारगिल को उसका हक न देना केंद्र और राज्यपाल प्रशासन की विभाजनकारी राजनीति की एक कड़ी है। उन्होंने कहा कि दोनों जिलों में रोटेशन स्तर पर डिवीजन हेडक्वार्टर और संबंधित विभाग शिफ्ट किए जाएं।
नवा ए सुबह हेडक्वार्टर से जारी बयान में डॉ. फारूक ने कहा कि कारगिल के लोगों को विभाजन की राजनीति का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। सरकार ने एक ही जिले के लिए एसआरओ लाकर कारगिल की अनदेखी की है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा राज्यपाल प्रशासन का दुरुपयोग कर रही है।
अपने स्वार्थ के लिए समुदाय में दरार डाली जा रही है। उन्होंने कहा कि कारगिल के लोगों के प्रशासनिक सेवाओं के लिए लंबित मांग रही है। सरकार की ओर से सचिव स्तर की गठित की गई कमेटी में कारगिल के लोगों की मांगों पर किस तरह से विचार किया गया।
इसके लिए विभिन्न शिष्टमंडलों ने रोटेशन स्तर पर हेडक्वार्टर को दोनों जिलों में शिफ्ट करने की मांग की है। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस महत्वपूर्ण मांग को नजरअंदाज किया गया है। यह राजनीति से प्रेरित है। पार्टी के उपप्रधान उमर अब्दुल्ला ने भी लेह और कारगिल में रोटेशन स्तर पर हेडक्वार्टर को शिफ्ट करने की मांग की वकालत की है।