फारूक अब्दुल्ला का पूतला जलाते प्रदर्शनकारी
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नेकां अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री डा. फारूक अब्दुल्ला के पीओजेके पर दिए विवादित बयान पर बवाल जारी है। पूरे जम्मू संभाग में फारूक के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूटा। उनका पुतला फूंका गया और नारेबाजी की गई। जम्मू के साथ ही कठुआ, उधमपुर, आरएस पुरा, विजयपुर, अखनूर में फारूक के खिलाफ प्रदर्शन किया गया। शिवसेना ने भी फारूक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
शनिवार को भाजपा जम्मू पश्चिम जिला इकाई के कार्यकर्ताओं ने डा. फारूक का पुतला जलाकर प्रदर्शन किया और उन पर असंवैधानिक भाषा के प्रयोग करने का आरोप लगाया। कच्ची छावनी में प्रदर्शन में जिला प्रधान अयोध्या गुप्ता ने कहा कि डा. फारूक सुर्खियों में बनने के लिए ऐसे मुद्दे उठा रहे हैं, जिनका कोई सरोकार नहीं है। रियासत के महाराजा हरि सिंह ने पूरे राज्य का विलय भारत में किया था।
डा. फारूक के पिता स्वर्गीय शेख अब्दुल्ला ने भी माना था कि पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा है। वह अपने पिता के खिलाफ भी जा रहे हैं। अगर उन्हें पाकिस्तान से प्यार है, तो वह पाकिस्तान जा सकते हैं। उन्होंने फारूक से अपने बयान के लिए राष्ट्र से माफी मांगने को कहा।
ये था डॉ. फारुक का बयान
रियासत के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला
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पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला द्वारा जम्मू कश्मीर पर दिए विवादित बयान पर भाजपा जिला ग्रामीण की ओर से जम्मू अखनूर मार्ग पर फारूक अब्दुल्ला का पुतला जलाया। इस मौके पर उपस्थित जिला प्रधान ओमी खजूरिया ने कहा कि फारूक अब्दुल्ला ने ऐसा ब्यान देकर न सिर्फ हिंदुस्तान, बल्कि संसद का भी अपमान किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संसद में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को लेकर प्रस्ताव पास कर इसे भी भारत का अभिन्न अंग बताया है, जबकि फारूक अब्दुल्ला ने यह कह कर भारतीयों और भारत की संसद का अपमान किया है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर किसी के बाप का नहीं है। इस मौके पर भाजपा कार्यकर्ताआें ने फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ नारेबाजी भी की। शिवसेना (बाला साहेब ठाकरे) प्रमुख डिंपी कोहली ने फारुक के बयान को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया।
चिनाब वैली के दौरे के दौरान उन्होंने पीओके पर भारत के दावे को लेकर विवादित बयान देते हुए कहा था कि यह भारत की बपौती नहीं है, जिसे वह हासिल कर ले। मोदी सरकार को भी चुनौती दी थी कि वह पीओके को लेकर दिखाए। उन्होंने पीओके पर संसद में पारित प्रस्ताव पर कहा था कि पीओके फिलहाल पाकिस्तान के कब्जे में है। यह भारत की निजी संपत्ति नहीं, जिस पर वह अपना दावा इस तरह करे जैसे पुरखों की संपत्ति हो। कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान एक पक्ष है। कश्मीर समस्या के समाधान के लिए भारत के पास पाकिस्तान के साथ बातचीत करने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं है।