उपराज्यपाल ने कहा कि 1983 में जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में पहला केवीके खुला था। उसके नौ साल बाद दूसरा केंद्र खोला गया। बताया गया है कि सांबा जिले में सिंचाई के पानी की किल्लत है। ऐसे में कृषि वैज्ञानिकों को इस पर भी कार्य करना चाहिए। किसान हमारे प्रेरणास्रोत हैं। किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए बेहतर तकनीक के बारे में किसानों को जागरूक किया जाए। आज तीन किताबों का विमोचन किया गया है। तीनों को स्थानीय भाषाओं में ही लिखा जाए ताकि किसानों को पूरी समझ आ सके।
उपराज्यपाल ने हाल में किए गए सुधारों के बारे में कहा कि पहले यदि सेब का बाग लगाना होता था तो सरकार से अनुमति लेनी होती थी। अब ऐसा नहीं होगा, किसी सरकारी अनुमति की जरूरत नहीं होगी। किसानों को पहले साल में 25 ट्रैक्टर दिए जाते थे। अब 500 ट्रैक्टर दिए जाने के निर्देश जारी किए गए हैं। वहीं जिले में मुफ्त में थ्रेशर भी उपलब्ध कराई जाएगा। इस अवसर पर लगाए गए स्टाल का भी उपराज्यपाल ने जायजा लिया।
नई औद्योगिक योजना के बारे में कहा कि 2037 तक उद्योगों को सब्सिडी का प्रावधान है। 28400 करोड़ का उद्योगों को पैकेज दिया गया है। इससे प्रदेश में उद्योगों का जाल बिछेगा। रोजगार तथा स्वरोजगार के अवसर पैदा होंगे।
किसानों को किया सम्मानित
अच्छी व उत्तम खेती करने वाले किसानों को उपराज्यपाल ने सम्मानित किया। रामगढ से विनोद कुमार को गन्ने से गुड़ बनाने, सवर्ण सिंह व कार्तिक को मशरूम, प्रकाश चौधरी को पोल्ट्री, शिव कुमार को फूल की खेती, चमन लाल सब्जी उत्पादन, सुशांत को शहद उत्पादन और विनोद कुमार को वर्मी कंपोस्ट बनाने के लिए उपराज्यपाल ने सम्मानित किया।