कमजोर मानसून की भविष्यवाणी से सहमे किसानों को मानसून ने राहत दी है। खरीफ की मुख्य फसलें वक्त पर लगा ली गई हैं। इसमें मुख्य रूप से मक्की और धान शामिल हैं। मैदानी इलाकों में सीमांत इलाकों को छोड़ कर बाकी सभी जगह धान लगा ली गई है। पहाड़ी इलाकों में मक्की लगाने का काम भी पूरा कर लिया गया है।
ऐसे में उम्मीद जताई जा रहा है कि इस बार धान और मक्की दोनों की ही बंपर पैदावार होगी। बशर्ते समय पर बारिश होती रहे। जानकारी के अनुसार जम्मू संभाग में करीब दो लाख हेक्टेयर पर मक्की की बिजाई की गई है, जबकि डेढ़ लाख हेक्टेयर पर धान की अलग-अलग किस्में लगाई गई हैं।
इनमें से गैर बासमती किस्में दो से तीन महीने के भीतर पक जाएंगी, जबकि बासमती पांच से छह महीने में पकेगी। मक्की की फसल दो से तीन महीने में पक जाएगी। कृषि विशेषज्ञ शेर-ए-कश्मीर कृषि एवं तकनीकी विज्ञान विश्वविद्यालय के रिसर्च विभाग के निदेशक जेपी शर्मा का कहना है कि आमतौर पर बासमती लगाने के लिए 15 जुलाई तक समय रहता है।
किसानों ने लगभग बासमती लगा ली है। गैर बासमती किस्में कुछ दिन पहले ही लगा ली गईं। मक्की भी कुछ दिन पहले किसानों ने लगा ली है। ऐसे में दोनों ही फसलों की पैदावार अच्छी होने की उम्मीद की जा सकती है, क्योंकि धान ऐसी फसल है, जिसको सूखे में भी लगाने के बाद पानी मिल जाए तो वो अच्छी हो जाती है। खेतों में नमी की मौजूदा स्थिति धान के लिए ठीक है। कम से कम एक हफ्ते तक नमी खत्म नहीं होगी।