जम्मू। कोरोना संक्रमण से लड़ रहे मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। जीएमसी जम्मू के बायोकैमिस्ट्री विभाग में कोविड-19 आईजीजी (इम्यून ग्लोबिन जी) एंटीबॉडी टेस्ट सुविधा शुरू की गई है। अत्याधुनिक स्वचालित इलेक्ट्रो कैमिलिनेंसेंस तकनीक से इस सुविधा में पता लगाया जाएगा कि संक्रमण से पीड़ित या सामान्य में किस व्यक्ति के शरीर में कोरोना संक्रमण से लड़ने के लिए किस स्तर पर आईजीजी एंटीबॉडी विकसित हुई है। अगर उनमें उच्च गुणवत्ता वाली एंटीबॉडी बनी है तो ऐसे लोग संक्रमण से लड़ सकते हैं। इस नई तकनीक से विभाग में एक घंटे में एक साथ 500 टेस्ट किए जा सकेंगे। इससे प्रदेश के विभिन्न जिलों में व्यापक स्तर पर एंटीबॉडी टेस्ट किए जा सकेंगे। इससे पहले जीएमसी के ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग में कोविड एंटीबॉडी के एलिजा टेस्ट किए जा रहे थे। लेकिन इसमें व्यापक स्तर पर सैंपल लगाने की क्षमता नहीं थी।
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पहले दिन 28 संक्रमितों के सैंपल जांचे
22 में आईजीजी एंटीबॉडी 78 फीसदी
बायोकैमिस्ट्री विभाग के एचओडी डॉ. एएस भाटिया ने बताया कि वीरवार पहले दिन ब्लड बैंक से लिए गए 28 संक्रमित मरीजों के सैंपल में 22 में 78.57 फीसदी आईजीजी एंटीबॉडी पाई गई। छह में 21.43 फीसदी ही एंटीबॉडी पाई गई है। विभाग में पहले से स्थापित मशीन पर शुरू की गई इस नई तकनीक से कोविड देखभाल प्रबंधन को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। इसमें विभिन्न क्षेत्रों में आकलन लगाया जा सकेगा कि वहां कितनी आबादी में कोविड आईजीजी एंटीबॉडी विकसित हुई है। जी, ए, एम, ई और डी तरह की एंटीबॉडी होती हैं, जिसमें पहले जी एंटीबॉडी की शिनाख्त की जाती है।
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कोविड बायोमार्कर से भी जांची जा रही
मरीजों में कारोना से लड़ने की क्षमता
डॉ. एएस भाटिया ने कहा कि स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के वित्तीय आयुक्त अटल डुल्लू के मार्गदर्शन में विभाग में पहले से कोविड बायोमार्कर सुविधा भी शुरू की गई है, जो कोविड संक्रमित मरीजों की देखभाल में वरदान साबित हो रही है। इसमें पता लगाया जाता है कि मरीज में कोरोना से लड़ने के लिए कितनी क्षमता है और उसी के मुताबिक उसे चिकित्सा दी जाती है।