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Jammu News: एम्स में दुर्लभ फ्रेजर सिंड्रोम से पीड़ित 5 माह के शिशु की नेत्र सर्जरी

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जन्मजात क्रिप्टोफ्थैल्मोस और जनन-मूत्र संबंधी गंभीर विकृतियों से ग्रस्त था शिशु
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संवाद न्यूज एजेंसी
सांबाविजयपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) विजयपुर के चिकित्सकों ने दुर्लभ जन्मजात बीमारी फ्रेजर सिंड्रोम से पीड़ित पांच माह के शिशु की जटिल पुनर्निर्माण नेत्र सर्जरी सफलतापूर्वक कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। शिशु जन्मजात क्रिप्टोफ्थैल्मोस और जनन-मूत्र संबंधी गंभीर विकृतियों से ग्रस्त था।
एम्स में जांच के दौरान चिकित्सकों ने शिशु में रेक्टोवेसिकल फिस्टुला और क्रिप्टोफ्थैल्मोस की पुष्टि की। इसके बाद बाल शल्य चिकित्सा विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. लकी गुप्ता के नेतृत्व में टीम ने एक ही चरण में सफल प्राइमरी सैजिटल रेक्टोप्लास्टी कर रेक्टोवेसिकल फिस्टुला का उपचार किया।
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इसके बाद नेत्र रोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नाजिया अंजुम के नेतृत्व में शिशु की दोनों पलकों की पुनर्निर्माण सर्जरी की गई। इस जटिल ऑपरेशन में वरिष्ठ रेजिडेंट डॉ. शेफाली वर्मा सहित जूनियर रेजिडेंट्स की टीम ने सहयोग किया। सर्जरी डॉ. नितिन कुमार, अतिरिक्त प्रोफेसर, की देखरेख तथा विभागाध्यक्ष डॉ. भवानी रैना के मार्गदर्शन में संपन्न हुई।

डॉ. नाजिया अंजुम ने बताया कि ऐसे मामलों में उपचार एक ही सर्जरी तक सीमित नहीं होता, बल्कि मरीज की उम्र, आंखों की स्थिति, शारीरिक संरचना और बीमारी की प्रकृति के अनुसार चरणबद्ध उपचार योजना बनाई जाती है, ताकि कार्यक्षमता के साथ-साथ बेहतर सौंदर्यात्मक परिणाम भी प्राप्त किए जा सकें।

सर्जरी के दौरान एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. श्रुति शर्मा, डॉ. रक्षा कुंडल, डॉ. सलोमी गुप्ता और डॉ. अलीशा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एम्स के कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रो. (डॉ.) संजीव सिन्हा ने कहा कि यह सफलता एम्स जम्मू की दुर्लभ और जटिल जन्मजात बीमारियों के उपचार में विशेषज्ञता, उन्नत तकनीक और बहु-विषयक चिकित्सा व्यवस्था का प्रमाण है।
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उन्होंने बताया कि पुनर्निर्माण नेत्र सर्जरी केवल जन्मजात विकृतियों तक सीमित नहीं है। सड़क दुर्घटनाओं, औद्योगिक हादसों और चेहरे की गंभीर चोटों के मामलों में भी आधुनिक माइक्रोसर्जरी, इम्प्लांट और प्रोस्थेटिक तकनीकों की मदद से आंखों और आसपास के क्षतिग्रस्त ऊतकों का सफल पुनर्निर्माण संभव हो रहा है।
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