नेत्र चिकित्सा में सुधार को पहल : एम्स में रेटिना डायग्नोस्टिक्स पर एआईओएस प्रयोगशाला ई-कनेक्ट कार्यशाला आयोजित
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) विजयपुर के नेत्र विज्ञान विभाग की ओर से ऑल इंडिया ऑप्थेल्मोलॉजिकल सोसाइटी प्रयोगशाला ई-कनेक्ट कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का विषय रेटिना डायग्नोस्टिक्स रहा, जिसमें देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए और प्रतिभागियों को रेटिना जांच तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया।
एम्स विजयपुर कन्वेंशन सेंटर में आयोजित इस कार्यशाला में एएसकॉमएस जम्मू की प्रोफेसर एवं नेत्र विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. रेणु हाशिया ने मधुमेह रोगियों में मोतियाबिंद सर्जरी पर जानकारी दी। वहीं आरपी सेंटर ऑफ ऑप्थेल्मिक साइंसेज, एआईएम्स नई दिल्ली के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. शौर्य वर्धन आजाद ने इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी की मूल अवधारणाओं और उसकी व्याख्या पर प्रकाश डाला।
पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सिमर रंजन सिंह ने बच्चों में रेटिना इमेजिंग और उसकी व्याख्या के बारे में बताया। शार्प साइट ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स की वरिष्ठ सलाहकार डॉ. रिम्पिका महाजन ने एंटी-वीईजीएफ दवाओं के विभिन्न प्रकारों पर चर्चा की। पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ के डॉ. अतुल अरोड़ा ने ओसीटी एंजियोग्राफी और उसकी उपयोगिता की जानकारी दी, जबकि जीएमसी श्रीनगर की डॉ. सादफ अल्ताफ ने ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी की तकनीक और व्याख्या पर व्याख्यान दिया।
ओसीटी एंजियोग्राफी का प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया
कार्यशाला में फंडस फ्लोरेसिन एंजियोग्राफी, ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी और ओसीटी एंजियोग्राफी की प्रायोगिक प्रशिक्षण भी दी गई। यह प्रशिक्षण पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ के अरुण कपूर और सुशील भाट तथा ईएसआई अस्पताल जम्मू की भव्या कपूर के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यशाला में एम्स जम्मू, जीएमसी कठुआ, जीएमसी ऊधमपुर, एएसकॉमएस सिधड़ा और स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों एवं रेजिडेंट डॉक्टरों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन एम्स विजयपुर के नेत्र विज्ञान विभाग की टीम ने किया, जिसमें डॉ. भवानी रैना कार्यक्रम अध्यक्ष, डॉ. नितिन कुमार कार्यक्रम निदेशक, डॉ. नाजिया अंजुम आयोजन सचिव और डॉ. रिधम नंदा सह-आयोजन सचिव शामिल रहे।
नेत्र रोगियों की बेहतर देखभाल हो सकेगी
एम्स विजयपुर के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. (डॉ.) संजीव सिन्हा ने कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए कहा कि इस तरह के वैज्ञानिक कार्यक्रम चिकित्सकों और रेजिडेंट्स को नई तकनीकों की जानकारी देने के साथ उनकी जांच क्षमता को मजबूत बनाते हैं। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा और मरीजों की बेहतर देखभाल के लिए संस्थानों के बीच सहयोग और प्रशिक्षण को महत्वपूर्ण बताया। कार्यशाला ने विभिन्न संस्थानों के नेत्र विशेषज्ञों को अनुभव साझा करने और आधुनिक रेटिना इमेजिंग तकनीकों को समझने का अवसर प्रदान किया। विशेषज्ञ व्याख्यान और प्रायोगिक प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों ने उन्नत जांच विधियों की जानकारी हासिल की, जिससे भविष्य में मरीजों को बेहतर उपचार सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।