युवाओं में महंगे नशे का चलन बढ़ा है। नशे की लत पूरी करने के लिए हेरोइन का ज्यादा सेवन किया जा रहा है। इसकी गिरफ्त में बड़े घरों के लाडले ज्यादा हैं। नीडल और सूंघने के माध्यम से नशे का ज्यादा स्वाद लिया जा रहा है।
पाश इलाकों में यह शौक बढ़ा है। नशे के लिए युवा अपराध का दामन भी थाम रहे हैं। साइक्रेटरी अस्पताल में मानसिक रोगियों की ओपीडी से ज्यादा नशे के पीडि़तों की संख्या बढ़ी है।
साइक्रेटरी अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 100-120 मानसिक रोगी पहुंच रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से अस्पताल के ओपियम सब्सिट्यूट थेरेपी (ओएसटी) केंद्र में नशे के पीडि़तों की संख्या 150 तक पहुंच गई है, यानी मानसिक रोगों से अधिक युवा नशे का शिकार हो रहे हैं।
केंद्र में अभी तक 250 मरीज पंजीकृत किए गए हैं। इनमें 16-30 आयु वर्ग के युवा शामिल हैं, लेकिन मनोचिकित्सकों के पास अलग से कुछ युवतियां भी यह इलाज ले रही हैं, जिससे शहर के पाश इलाकों में युवकों के साथ युवतियां भी इस नशे की चपेट में हैं।
हेरोइन को पानी में मिलाकर ड्रग्स को इंजेक्शन से शरीर में डाल दिया जाता है। ऐसी ड्रग्स लेने वाले नशेड़ी कई आपराधिक घटनाओं में शामिल पाए गए हैं। इस महंगे शौक को पूरा करने से पहले यह ड्रग्स रोजाना तीन-चार हजार रुपये में ली जाती है, लेकिन धीरे-धीरे डोज बढ़ने पर इसकी कीमत मोटी हो जाती है।
इस ड्रग्स को लेने से अमूमन ऐसे नशेडि़यों के फेफड़ों में इन्फेक्शन रहता है। डोज न लेने पर शरीर में जबरदस्त दर्द, शरीर का टूटना, नाक और मुंह से पानी चलना, कमजोरी महसूस करना आदि समस्या होती है।
साइक्रेटरी अस्पताल में कार्यरत वरिष्ठ मनोचिकित्सक डा. जगदीश थापा के अनुसार शहर और आसपास के इलाके में हेरोइन का नशा बढ़ा है। अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में नशे से पीडि़त ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं। ओएसटी थेरेपी में पीडि़त को वैकल्पिक दवाइयां देकर धीरे-धीरे डोज कम करके नशे की लत छुड़ाई जाती है।