प्रशासन की ओर से बोटाकादल से इमामबाड़ा जडीबल तक की गई थीं आवश्यक व्यवस्थाएं
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। आठवें मुहर्रम के जुलूस की अनुमति के बाद प्रदेश प्रशासन ने श्रीनगर के डाउनटाउन के बोटाकदल इलाके से इमामबाड़ा जडीबल तक यौमे आशूरा के अवसर पर बुधवार को ज़ुल्जिना के जुलूस निकालने की अनुमति दी। इस दौरान आजादारों ने हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों को याद किया। इस मातमी जुलूस में एक फिर आपसी सद्भाव और भाईचारे की मिसाल देखने को मिली। एक तरफ जहां इसमें कश्मीरी पंडित समुदाय के लोग शामिल हुए, तो वहीं काले कपड़े में स्थानीय सिख युवक आजादारों को पानी पिलाते नजर आए।
बोटाकदल इलाके से बुधवार सुबह जुल्जिना का जुलूस निकाला गया। इसमें बड़ी संख्या में आजादार शामिल हुए। इसके बाद यह मातमी जुलूस इमामबाड़ा जडीबल की ओर बढ़ना शुरू हुआ। आशूरा हजरत इमाम हुसैन (एएस) की शहादत का प्रतीक है, जो लगभग 1400 साल पहले अपने परिवार के सदस्यों और साथियों के साथ कर्बला में शहीद हुए थे। इस अवसर पर बोटाकदल में ज़ुल्जिना के जुलूस में एडीजीपी विजय कुमार, आईजीपी कश्मीर ज़ोन वीके बिरदी, डिवकॉम वीके बिधूड़ी, डीसी श्रीनगर बिलाल मोहियुद्दीन भट और अन्य अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन ने बोटाकादल से इमामबाड़ा ज़डीबल तक आवश्यक व्यवस्था की थी। सुरक्षा भी कड़ी रही।
जुलूस के दौरान कश्मीरी पंडित अजय कौल ने कहा कि वह कई वर्षों से आशूरा के जुलूस में भाग लेते आए हैं। उन्होंने कहा कि उनका धर्म भी अहिंसा का पथ अपनाने को कहता है। इमाम हुसैन का भी यही पैगाम रहा है। सिख युवक भी इस जुलूस में शामिल आजादारों को पानी पिलाते नजर आए। उन्होंने कहा कि हम सब भाईचारे का संदेश देना चाहते हैं और चाहते हैं कि सब धर्मों के लोग अमन और शांति से रहें। वहीं, डिवकॉम कश्मीर की पत्नी रिचा बिधूडी भी काले वस्त्र पहने आजादारों को पानी की बोतल देती दिखीं।