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आर्म्ड फोर्स की मांगों पर सरकार दे ध्यान

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अखनूर। दि रिटायर्ड सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेस वारियर्स वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्यों की सोमवार जियो पोता घाट में बैठक हुई । इसकी अध्यक्षता जोनल प्रधान सुरजीत सिंह रिटायर्ड ने की। बैठक अध्यक्ष सुरजीत सिंह ने कहा देश के विभिन्न सुरक्षा बल का काम एक नाम अलग-अलग हैं। पैरा मिलिटरी के जवान क्या इस देश के जवान नहीं है। जो रात दिन हर मौसम में सीमाओं की रक्षा करते हैं।
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उन्होंने कह कि 40 साल से देश की सेवा करने वालों को न कोई सुविधा न ही पेंशन, सांसद और विधायक समाजसेवक हैं फिर भी पेंशन ले रहे हैं। यहां तक कि कुछ सांसद व विधायक जेल में रहकर भी पेंशन ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि वही नेता संसद में बैठ कर देश के रखवालों की पेंशन बंद करने का फरमान जारी करते हैं। पेंशन कोई इनाम नहीं, बल्कि यह पैरा मिलिटरी के जवान का संवैधानिक अधिकार है। क्योंकि वो अपनी जिंदगी के 40 महत्वपूर्ण साल अपने परिवार से दूर रह कर सीमा पर छाती पर गोलियां खाकर गुजरते हैं। उसके बुढ़ापे का सहारा पेंशन ही है।
देश का संविधान क्यों सबके लिए बराबर नहीं है। क्या देश की सभी सुविधाएं सिर्फ नेताओं के लिए हैं? नेताओं के लिए , जनता के लिए, पैरा मिलिटरी व सेना के लिए एक ही कानून होना चाहिए। पैरा मिलिटरी का जवान 35 से 40 साल सेवा करने के बाद भी पेंशन का हकदार नहीं, जबकि नेता अंत समय तक ही पैशन पाता है। यह कहां का न्याय है। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार पैरा मिलिटरी के साथ जुल्म करना बंद करे। हमारी कुछ मुख्य मांगें हैं जिन पर सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही है। अंदर ही अंदर बन रहा यह लावा एक दिन फटेगा और पैरा मिलिटरी के अंदर विद्रोह होगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
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बैठक में अर्जुन सिंह, राम लाल डोगरा, बलदेव राज, जगवीर सिंह, सोमनाथ शर्मा, थोडू राम, चगर सिंह मौजूद थे।
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