दस दिन से बंद की गई मोबाइल इंटरनेट सेवा से मोबाइल कंपनियों को हर रोज करीब पांच करोड़ रुपये की चपत लग रही है। सेलुलर आपरेटर एसोसिएशन आफ इंडिया की मानें तो दस दिन में पचास करोड़ का नुकसान मोबाइल कंपनियों को हो सकता है। रियासत में 45 लाख के करीब इंटरनेट उपभोक्ता हैं, इनमें 30 लाख के करीब मोबाइल इंटरनेट उपभोक्ता हैं।
जानकारी के अनुसार रियासत में एक करोड़ से ज्यादा मोबाइल उपभोक्ता हो चुके हैं। एक साल पहले राज्य में 98 लाख मोबाइल उपभोक्ताओं का आंकड़ा सामने आया था। मोबाइल इंटरनेट सेवा ठप होने से जहां कंपनियों को नुकसान हो रहा है, वहीं मोबाइल उपभोक्ताओं का इंटरनेट डाटा भी खत्म हो गया है।
लोगों के भी वैलिडिटी प्लान खत्म हो गए हैं, जिससे उन्हें नुकसान झेलना पड़ा है। मौजूदा समय में अधिकतर लोगों के पास स्मार्टफोन हैं, लेकिन बिना इंटरनेट के मोबाइल फोन खिलौना बन कर रहे हैं। उपभोक्ताओं से बात करने पर कुलदीप राज का कहना है कि स्मार्टफोन पर ही उनका कामकाज निर्भर करता है। बिना इंटरनेट के मोबाइल फोन पर कुछ करने को दिखता ही नहीं।
उपभोक्ताओं की बैटरी फुल
इंटरनेट सेवा ठप होने से बेशक मोबाइल उपभोक्ता परेशान हों, लेकिन इसका एक लाभ जरूर उपभोक्ताओं को हो रहा है। दरअसल, इंटरनेट चलाते वक्त कई एप्लीकेशन इस्तेमाल की जाती हैं। इसकी वजह से फोन की बैटरी काफी तेजी से डिस्चार्ज होती है।
इंटरनेट बंद होने से लोग विभिन्न मोबाइल एप्लीकेशन कम इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए उनके फोन की बैटरी भी कम डिस्चार्ज हो रही है। इंटरनेट चलाने पर जहां एक बार मोबाइल चार्ज करने से तीन चार घंटे ही निकलते हैं, वहीं अब दो-दो दिन फोन बिना चार्ज के चल रहे हैं।