जम्मू जिला मुख्यालय से करीब 55 किमी. की दूरी पर पहाड़ी पर स्थित पूरा राफ्ता गांव रविवार को डायरिया की चपेट में आ गया। गांव के चार सौ से अधिक ग्रामीणों को उल्टी और दस्त की शिकायत हुई है। इस गांव के साथ बगानी बेल्ट के ग्रामीण भी दूषित पानी पीकर डायरिया से पीड़ित हो गए हैं।
गांव में पीड़ितों में स्वास्थ्य विभाग की ओर से एंटीबायोटिक दवाइयां बांटने के साथ जागरूकता अभियान शुरू किया गया है। तीन एंबुलेंस के साथ एक चिकित्सा टीम को गांव में तैनात कर दिया गया है। कोट भलवाल पीएचसी हेडक्वार्टर को भी अलर्ट पर रखा गया है।
देर शाम तक किसी पीड़ित को जम्मू शिफ्ट नहीं किया गया था। स्वास्थ्य निदेशक जम्मू डा. बलजीत सिंह पठानिया के अनुसार गांव में हालात फिलहाल नियंत्रण में हैं। पीड़ितों तक सभी जरूरी चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं।
पिछले दो दिन से राफ्ता गांव में ग्रामीणों को उल्टी दस्त की शिकायत हो रही थी। ग्रामीण इसे वायरल रोग मानकर चल रहे थे। लेकिन रविवार को बारिश के बीच स्थिति उस समय विकराल रूप धारण कर गई जब एक साथ सैकड़ों लोगों को उल्टी, दस्त होने लगी। इसमें बच्चों सहित हर आयु वर्ग के लोग शामिल थे।
बीएमओ कोट भलवाल डा. सुषमा ने बताया कि डायरिया फैलने की जानकारी उन्हें रविवार को सुबह मिली। जिसके बाद चिकित्सा टीमों को दवाइयों के साथ राफ्ता गांव भेजा गया। खराब मौसम से पीड़ितों तक पहुंचने में मुश्किल हुई। देर शाम तक करीब चार सौ ग्रामीणों को चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करवा दी गई थी। लेकिन पीड़ितों का आंकड़ा ज्यादा हो सकता है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी जम्मू डा. रोबेंद्र खजूरिया के अनुसार तीन एंबुलेंस राफ्ता और दो एंबुलेंस कोट भलवाल में रखी गई हैं। ग्रामीणों ने बताया है कि गांव में कुछ दिन तक पीएचई की ओर से पानी की सप्लाई नहीं हुई। लेकिन बाद में जब हुई तो उसे पीकर वे बीमार होने लगे हैं।