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अतिक्रमण की गिरफ्त में मंदिरों का शहर

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इसके कारण सड़कें सिमट कर रह गई हैं। पैदल चलने के लिए भी रास्ता कम पड़ रहा है। हालात जाम के रूप में सामने आता है। यही नहीं, अतिक्रमण हादसों के लिए हालात पैदा कर रहा है।
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तंग और भीड़ भरे बाजारों में हादसों की आशंका अधिक रहती है। पुलिस प्रशासन और नगर निगम की ओर से हाईकोर्ट के निर्देश को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई के दौरान पुलिस का हस्तक्षेप होने के कारण निगम खुद को बेबस बताता है।

वहीं, अधिकतर रेहड़ी, फुटपाथ वाले किसी न किसी सियासी या प्रभावी लोगों के संपर्क में रहते हैं, जो कार्रवाई से बचाने तक में साथ देते हैं। शहर के किसी भी हिस्से में देखा जाए तो अतिक्रमण कई समस्याओं को पैदा कर रहा है।
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हाईकोर्ट के निर्देशों को दिखाया जा रहा ठेंगा

मंदिरों के शहर को अतिक्रमण से बचाने के लिए प्रशासन और सरकार विफल हो रही है। तमाम प्रयासों के बावजूद पुलिस चौकियों और थानों की आड़ में कुछ लोगों ने फुटपाथों तक पर कब्जा कर रखा है।

हाईकोर्ट के आदेशानुसार इलाके में अतिक्रमण होने पर संबंधित थानों के एसएचओ के जिम्मेदार हैं। इस आदेश के बाद सभी एसएचओ ने अपने-अपने इलाकों में अतिक्रमण हटाने का अभियान हटाया, लेकिन समय के साथ हालात पूर्ववत हो गए।

मौजूदा समय में ज्यूल चौक, कनाल रोड, बीसी रोड, बस स्टैंड, तालाब तिल्लो, पुरानी मंडी, पक्का डंगा, रघुनाथ बाजार, बिक्रम चौक, सतवारी और जानीपुर सहित कई इलाकों में दुकानदारों ने अतिक्रमण कर रखा है।
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