इसके कारण सड़कें सिमट कर रह गई हैं। पैदल चलने के लिए भी रास्ता कम पड़ रहा है। हालात जाम के रूप में सामने आता है। यही नहीं, अतिक्रमण हादसों के लिए हालात पैदा कर रहा है।
तंग और भीड़ भरे बाजारों में हादसों की आशंका अधिक रहती है। पुलिस प्रशासन और नगर निगम की ओर से हाईकोर्ट के निर्देश को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई के दौरान पुलिस का हस्तक्षेप होने के कारण निगम खुद को बेबस बताता है।
वहीं, अधिकतर रेहड़ी, फुटपाथ वाले किसी न किसी सियासी या प्रभावी लोगों के संपर्क में रहते हैं, जो कार्रवाई से बचाने तक में साथ देते हैं। शहर के किसी भी हिस्से में देखा जाए तो अतिक्रमण कई समस्याओं को पैदा कर रहा है।