लंबे समय से सरकारी कर्मचारी और सेवानिवृत्त कर्मचारी 17 प्रतिशत महंगाई भत्ते की किश्त जारी करने की मांग कर रहे हैं। अब सरकार ने चुनाव आचार संहिता लागू होने का बहाना बनाकर किश्त रोक दी है, जबकि 2009 में लोकसभा चुनाव के दौरान राज्य सरकार ने चुनाव आचार संहिता लागू होने के बावजूद सात प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ाया था।
अगर उस समय आचार संहिता के दौरान महंगाई भत्ता दिया जा सकता है तो इस बार विधानसभा चुनाव में क्यों नहीं। ये बातें बुधवार को नेशनल मजदूर कांफ्रेंस प्रधान सुभाष शास्त्री ने कहीं।
सुभाष शास्त्री ने कहा कि राज्य सरकार ने जनवरी से जुलाई तक एक लाख सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों सहित 4.5 लाख सरकारी कर्मचारियों को 17 प्रतिशत महंगाई भत्ता नहीं दिया है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है। कर्मचारियों को कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
चुनाव आचार संहिता के लागू होने से पहले राज्य सरकार जल्द किश्त जारी करने की बात कर रही थी, लेकिन अब जबसे विधानसभा चुनाव को लेकर आचार संहिता लागू हुई है, राज्य सरकार को नया बहाना मिल गया है, लेकिन 2009 में इसी राज्य सरकार ने चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करके कर्मचारियों को सात प्रतिशत महंगाई भत्ता दिया था।
उनकी मांग है कि जल्द से जल्द मंहगाई भत्ता जारी किया जाए। इस मौके पर राजन बाबु, सुनील कोछर, सुरेंद्र कुमार और अन्य कई लोग मौजूद थे।