जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव अगले साल हो सकते हैं। इसको देखते हुए जम्मू-कश्मीर के विभिन्न राजनीतिक दलों ने 5 अगस्त 2019 के बाद पहली बार राजनीतिक जमीन पर अपना काम शुरू कर दिया है। सूत्र बताते हैं कि परिसीमन आयोग ने जम्मू-कश्मीर में कुछ पुरानी विधानसभा सीटों के नए और पुनर्गठन की अपनी मसौदा रिपोर्ट पूरी कर ली है।
पार्टियों ने शुरू किया जनसंपर्क अभियान
नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, जम्मू-कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी, जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के नेताओं सहित सभी प्रमुख राजनीतिक दलों और अन्य छोटे समूहों ने बैठकों और रैलियों के माध्यम से जनता के साथ सार्वजनिक संपर्क शुरू कर दिया है।
गुलाम नबी आजाद दक्षिण कश्मीर के दौरे पर
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद दक्षिण कश्मीर के दौरे पर हैं। शनिवार को कुलगाम के देवसर में थे जबकि रविवार को उन्होंने अनंतनाग जिले के कोकरनाग में सभा को संबोधित किया। नेकां, बीजेपी, पीडीपी, कांग्रेस और अन्य के वरिष्ठ नेताओं के करीबी सूत्रों का कहना है कि इनमें से कोई भी दल यह नहीं मानता है कि उसे अपनी नई विधानसभा में बहुमत मिल सकता है।
नेकां के करीबी माने जाने वाले एक पूर्व नौकरशाह ने कहा, इन दलों के वरिष्ठ नेता सार्वजनिक रूप से या मीडिया से जो कुछ भी कहते हैं, तथ्य यह है कि उनमें से किसी को भी अपने दम पर पूर्ण बहुमत प्राप्त करने का विश्वास नहीं है।
जम्मू संभाग में छह और घाटी में दो सीटें बढ़ेंगी
नए सिरे से परिसीमन के बाद विधानसभा में 90 सीटें होने की संभावना है। पिछली विधानसभा में 87 सीटें थीं, जिनमें से चार लद्दाख क्षेत्र की थीं जो अब एक अलग केंद्र शासित प्रदेश है। घाटी में 47 और जम्मू क्षेत्र में 36 सीटें थीं। सूत्र बताते हैं कि जम्मू क्षेत्र में कम से कम 6 सीटें जोड़ी जाएंगी और घाटी में मौजूदा विधानसभा क्षेत्रों में से 2 नए विधानसभा क्षेत्र बनाए जाएंगे।
इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जाति आदि के लिए विधानसभा क्षेत्र आरक्षित होंगे, जो इस केंद्र शासित प्रदेश के लिए अलग राजनीतिक परिदृश्य पेश करेंगे। पिछली राज्य विधानसभा में पीडीपी को 28, बीजेपी को 25, एनसी को 15 और कांग्रेस के पास 12 सीटें थीं।
भाजपा में नजर आ सकते हैं नए चेहरे
इस बीच भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से जुड़े सूत्रों का कहना है कि दिल्ली में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने जमीनी हकीकत पर ध्यान दिया है। ऐसे में वर्ष 2014 के चुनाव में उतरे ज्यादातर भाजपा नेता आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट न पाएं तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के एक सूत्र ने कहा- स्थानीय नेतृत्व में कई ऐसे उभरते चेहरे हैं और जिन्हें 2022 के विधानसभा चुनावों में उतारने का फैसला किया गया है।
पीपुल्स कांफ्रेन्स व अपनी पार्टी भी देगी चुनौती
कश्मीर घाटी में, नेकां और पीडीपी को एक-दूसरे और सज्जाद गनी लोन की अध्यक्षता वाली पीसी और सैयद अल्ताफ बुखारी की अध्यक्षता वाली अपनी पार्टी जैसे अन्य राजनीतिक दलों से चुनौतियों का सामना करने की संभावना है। पीसी और अपनी पार्टी अभी भी एनसी और पीडीपी के रूप में जमीनी स्तर के कैडर बनाने से दूर हो सकते हैं, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं है कि ये दोनों पार्टियां कुछ सीटों पर परेशान कर सकती हैं।