कश्मीर की घाटी के तीन निर्वाचन क्षेत्रों में अच्छा मतदान हुआ। घाटी ने हिंसा को नकारा और बुलेट और बहिष्कार के बदले बैलेट को चुना। कश्मीरी प्रवासियों के लिए अलग से विशेष व्यवस्था की गई थी ताकि हर नागरिक को पूरा अवसर मिला। तब सरलीकरण किया गया था। तब फॉर्म एम में ढील दी गई थी।
जम्मू-कश्मीर में चुनाव के दौरान पुनर्मतदान की जरूरत नहीं पड़ी। कोई बड़ी हिंसा नहीं हुई। गड़बड़ी रोकने के लिए जम्मू-कश्मीर में 100 करोड़ रुपये मूल्य की जब्ती भी हुई थी। जम्मू-कश्मीर में 90 निर्वाचन क्षेत्र हैं। यहां 87.09 लाख मतदाता हैं। 44.46 लाख पुरुष और 42.63 लाख महिला मतदाता होंगी। यहां पहली बार मतदान करने वालों की संख्या 3.71 लाख होगी। साथ ही कुल 20 लाख से ज्यादा युवा मतदाता होंगे।
जम्मू-कश्मीर में 90 निर्वाचन क्षेत्र हैं। यहां 87.09 लाख मतदाता हैं। 44.46 लाख पुरुष और 42.63 लाख महिला मतदाता होंगी। यहां पहली बार मतदान करने वालों की संख्या 3.71 लाख होगी। साथ ही कुल 20 लाख से ज्यादा युवा मतदाता होंगे।
हाल ही में चुनाव आयोग की टीम ने जम्मू-कश्मीर का दौरा किया था। इस दौरान टीम ने वहां से राजनीतिक दलों और अफसरों के साथ बैठक की थी। इस बैठक में तैयारियों की समीक्षा की गई थी।
370 हटने के बाद पहली बार जम्मू-कश्मीर में चुनाव होंगे। 2019 में अनुच्छेद 370 खत्म करने के बाद जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश घोषित कर दिया गया था। उसके बाद से ही वहां के राजनीतिक दल लगातार राज्य का दर्जा वापस दिए जाने की मांग कर रहे थे। उधर, सरकार की ओर से कहा जा रहा था कि पहले राज्य में चुनाव होंगे और उसके बाद ही राज्य का दर्जा वापस दिया जाएगा।
उमर अब्दुल्ला बोले- हम तैयार हैं
नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में चुनाव की तारीखों के एलान के बाद अपने एक्स अकाउंट पर प्रतिकिया दी है। उन्होंने कहा कि हाल के चुनावों की स्याही का निशान गया नहीं है और हम चुनावी मोड में वापस आ गए हैं। हम तैयार हैं।