चुनाव आयोग जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान अमरनाथ यात्रा के बाद करेगा। यात्रा एक जुलाई से शुरू होगी जो 15 अगस्त तक चलेगी। स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया इस साल कुछ समय बाद शुरू हो सकती है।
आयोग के बयान के अनुसार चुनाव पैनल ने सर्वसम्मति से यह तय किया है कि चुनाव कराने पर विचार इस वर्ष अंत में किया जा सकता है। आयोग राज्य में पल-पल की स्थिति की निगरानी करेगा। सभी जगहों से इनपुट्स के आधार पर अमरनाथ यात्रा के बाद चुनाव की तारीखों की घोषणा संभव है। राज्य विधानसभा में 87 सीटें हैं।
भाजपा के गठबंधन सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद 19 जून को राज्यपाल शासन लग गया था। छह महीने की अवधि पूरी होने के बाद 19 दिसंबर से राष्ट्रपति शासन है, जिसकी मियाद 19 जून को समाप्त हो जाएगी। इसके बाद फिर राष्ट्रपति शासन बढ़ाया जाएगा। संविधान के अनुसार राष्ट्रपति शासन में छह महीने की अवधि में चुनाव कराना अनिवार्य है।
लोकसभा चुनाव की तिथि का जब 10 मार्च को एलान किया गया तो उस वक्त आयोग ने यहां की चुनाव तिथियों का एलान नहीं किया था। इसके बाद तीन सदस्यीय पर्यवेक्षकों के दल को भेजा गया था जिसने जम्मू व कश्मीर में सभी राजनीतिक दलों से मुलाकात कर उनकी राय जानी थी। पर्यवेक्षकों ने लोकसभा चुनाव के बाद विधानसभा चुनाव कराने संबंधी रिपोर्ट दी थी।
हालांकि, अप्रैल में राज्य प्रशासन के अधिकारियों ने आयोग के साथ मुलाकात कर कहा था कि पर्यटक सीजन तथा अमरनाथ यात्रा के मद्देनजर राज्य में निकट भविष्य में विधानसभा चुनाव न कराए जाएं। हालांकि, आयोग ने राज्य प्रशासन के तर्क को खारिज कर दिया था। उसका मानना था कि यदि लोकसभा चुनाव हो सकते हैं तो विधानसभा चुनाव कराने में क्या दिक्कत है।
यह बैठक पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट के बाद हुई थी जिसमें कहा गया था कि लोकसभा चुनाव के बाद विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने लोकसभा चुनाव के तत्काल बाद तथा अमरनाथ यात्रा से पहले विधानसभा चुनाव कराने की मांग की थी।