श्रीनगर संसदीय क्षेत्र में लोकसभा उप चुनाव के लिए पार्टियों का चुनाव प्रचार अभियान शुक्रवार को थम गया। रविवार नौ अप्रैल को संसदीय क्षेत्र में मतदान होगा। करीब 11.72 लाख मतदाता चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग कर पाएंगे।
2009 में श्रीनगर लोकसभा क्षेत्र में 25.55 फीसदी और 2014 में श्रीनगर लोकसभा चुनाव में मतदान करीब 25.90 फीसदी रहा था। प्रतिष्ठित श्रीनगर लोकसभा सीट पर पार्टियों के चुनाव प्रचार पर इस बार घाटी के हालात का साया रहा। गांदरबल, बीरवाह, कंगन जैसे इलाकों में भी चुनाव प्रचार अभियान के दौरान बड़ी रैलियों का आयोजन नहीं हुआ। छोटी-छोटी रैलियों का आयोजन पार्टियों की तरफ से जरूर किया गया।
अलगाववादियों के चुनाव बहिष्कार के आह्वान व बंदूक के भय से राजनीतिक पार्टियों व अन्य उम्मीदवारों ने ज्यादातर अपनी आवाज मतदाताओं तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया। श्रीनगर संसदीय क्षेत्र में प्रमुख मुकाबले में नेशनल कांफ्रेंस के डा. फारूक अब्दुल्ला और पीडीपी के उम्मीदवार नजीर अहमद खान हैं।
चुनाव प्रचार में सोशल मीडिया की प्रमुख भूमिका
सोशल मीडिया
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नेकां की तरफ से सोशल मीडिया अभियान के प्रभारी रहे एजाज जान का कहना है कि 90 फीसदी तक युवा सोशल मीडिया, जिसमें फेसबुक, व्हाट्सएप आदि से जुड़े हैं। ऐसे में सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं तक पहुंचना सरल है। इससे कुछ लोग सहमत व असहमत हो सकते है लेकिन लोकतंत्र के हिस्से के तौर पर युवाओं से संपर्क साधने के लिए सोशल मीडिया बेहतर माध्यम है।
पीडीपी ने भी सोशल मीडिया का जमकर इस्तेमाल किया। पीडीपी के सोशल मीडिया अभियान के प्रभारी एवं युवा इर्काई के अध्यक्ष वहीद परा के अनुसार पीडीपी ने हाल मीटिंग, कार्यकर्ताओं से बैठकें और डोर टू डोर अभियान तो चलाया लेकिन रियासत की कुल जनसंख्या का 60 फीसदी हिस्सा युवाओं का है।
ऐसे में युवाओं तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया का पीडीपी ने भी प्रयोग किया। श्रीनगर संसदीय क्षेत्र से 2014 का लोकसभा चुनाव लड़कर 650 वोट हासिल करने वाले चेतन शर्मा का कहना हैं कि वह अखिल भारत भारत हिंदू महासभा के झंडे तले चुनाव लड़ रहे हैं और वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बताना चाहते हैं कि कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। इसके लिए वह युवाओं तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं।