आरएस पुरा। सरकार की ओर से शिक्षा का स्तर बेहतर बनाए जाने के लिए बडे़-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन हालात यह हैं कि सरकारी स्कूलों में मुख्याध्यापक के पद दो वर्षों से रिक्त पड़े हुए है जिसे भरा नही जा रहा।
कस्बे में स्थित मिल एरिया में लड़कों व लड़कियों के मिडिल स्कूल होने पर पिछले दो वर्षों से मुख्याध्यापक के पद रिक्त होने पर शिक्षा विभाग की ओर से नहीं भरा गया। इन दोनों स्कूलों में 120 के करीब बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। स्कूल में नियुक्त वरिष्ठ शिक्षक ही स्कूल चला रहे हैं। स्कूल में शिक्षा प्राप्त कर रहे बच्चों के अभिभावकों का कहना है कि सरकार की ओर से बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलाने के लिए कहा जाता है, लेकिन हालत है कि सरकारी मिडिल स्कूल का भवन खस्ता हालत में है, बेहतर सफाई व्यवस्था भी नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि इन स्कूलों में जरूरत के मुताबिक शिक्षकों को नियुक्त करने के साथ मुख्याध्यापकों के पद को भरा जाए।
समाजसेवी रमेश चौधरी का कहना है कि किसी प्राइमरी स्कूल में पांच बच्चे होने पर दो शिक्षक नियुक्त किए गए। सुरेश शर्मा ने कहा कि सरकारी स्कूलों में दोपहर को बच्चों को खाना मुहैया कराए जाने के साथ वर्दियां, किताबें आदि निशुल्क मुहैया कराई जाती हैं। इसके बावजूद अधिकतर लोग बच्चों को गैर सरकारी स्कूलों में ही शिक्षा दिलाना बेहतर समझते हैं। उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि स्कूलों में जरूरत के मुताबिक शिक्षकों को लगाया जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
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जिन स्कूलों में हेडमास्टर व शिक्षकों के पद रिक्त हैं उसकी सूची बना उच्चधिकारियों को भेजी गई है।
-कमला देवी, जोनल शिक्षा अधिकारी, आरएस पुरा