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Jammu News: लिखित परीक्षा ने बदला चयन का गणित जेकेपीएससी भर्तियों में ओपन मेरिट हावी

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- 2024-25 में लिखित परीक्षा आधारित भर्ती से ओपन मेरिट की हिस्सेदारी 70 फीसदी के पार
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- वर्ष 2023-24 में ओपन मेरिट का हिस्सा 36 फीसदी था, नई भर्ती नीति से चयन की तस्वीर बदली

गौरव रावत
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में सरकारी भर्तियों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। भर्ती प्रक्रिया में लिखित परीक्षा को मुख्य आधार बनाने के फैसले का असर अब चयन के आंकड़ों में साफ दिखने लगा है। इससे चयन का तरीका ही नहीं बदला, बल्कि इसके सामाजिक असर भी सामने आने लगे हैं। जम्मू-कश्मीर लोक सेवा आयोग की ताजा वार्षिक रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2024-25 में लिखित परीक्षा के जरिए हुई भर्तियों में ओपन मेरिट श्रेणी के उम्मीदवारों की हिस्सेदारी पहले के मुकाबले काफी बढ़ गई है।

वर्ष 2024-25 में केवल लिखित परीक्षा के आधार पर कुल 407 अभ्यर्थियों की सिफारिश की गई। इनमें से 286 उम्मीदवार ओपन मेरिट से चयनित हुए, जो कुल चयन का 70.27 फीसदी है। इसके मुकाबले वर्ष 2023-24 में लिखित परीक्षा से हुए चयन में ओपन मेरिट की हिस्सेदारी 36.12 फीसदी थी। एक ही साल में इतना बड़ा उछाल यह दिखाता है कि भर्ती नीति में किए गए बदलाव का सीधा असर चयन परिणामों पर पड़ा है।
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आंकड़ों से यह भी साफ होता है कि वर्ष 2024-25 में किसी भी आरक्षित श्रेणी की हिस्सेदारी 10 फीसदी तक नहीं पहुंच सकी। अनुसूचित जाति वर्ग की हिस्सेदारी 6.14 फीसदी, अनुसूचित जनजाति की 9.09 फीसदी और आरबीए वर्ग की 5.90 फीसदी रही। इसके अलावा एएलसी वर्ग की 1.97 फीसदी, एसएलसी की 2.95 फीसदी, ईडब्ल्यूएस की 1.47 फीसदी और पीएसपी वर्ग की 1.97 फीसदी हिस्सेदारी दर्ज की गई। दिव्यांग श्रेणी का हिस्सा 0.24 फीसदी रहा। इससे यह भी साफ होता है कि लिखित परीक्षा आधारित चयन में प्रतिस्पर्धा का स्तर काफी बढ़ गया है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि चयन प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए वर्ष 2024-25 में भर्ती को पूरी तरह लिखित परीक्षा आधारित किया गया। इसके साथ ही ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन, ई-ऑफिस व्यवस्था और सीसीटीवी निगरानी जैसे कदम अपनाए गए, ताकि मानवीय भूमिका कम हो और चयन समय पर पूरा किया जा सके।

भर्ती के इस बदले स्वरूप को सामाजिक नजरिये से भी अहम माना जा रहा है। जम्मू विश्वविद्यालय से जुड़े समाजशास्त्री प्रोफेसर अनिल कुमार का कहना है कि लिखित परीक्षा आधारित चयन से योग्यता का आकलन ज्यादा साफ तरीके से होता है। वह कहते हैं कि लिखित परीक्षा में पढ़ाई और तैयारी सबसे अहम हो जाती है। इससे चयन प्रक्रिया ज्यादा निष्पक्ष होती हैलेकिन जिन वर्गों के पास बेहतर पढ़ाई और तैयारी के मौके हैं, उन्हें इसका ज्यादा फायदा मिलता है।
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रिपोर्ट से यह संकेत भी मिलता है कि अगर आने वाले वर्षों में लिखित परीक्षा आधारित भर्ती व्यवस्था इसी तरह जारी रही, तो ओपन मेरिट की भूमिका और मजबूत हो सकती है। ऐसे में सरकार और आयोग के सामने अब यह चुनौती रहेगी कि योग्यता और पारदर्शिता बनाए रखते हुए सभी वर्गों को समान अवसर कैसे दिए जाएं।
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