- 15 साल से अधिक उम्र के पढ़ाई से वंचित लोगों के लिए तैयार हो रही आसान किताब
- पढ़ना-लिखना, गिनती और रोजमर्रा के जरूरी काम सीखने में मिलेगी मदद
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। प्रदेश में जो लोग कभी स्कूल नहीं जा सके या किसी वजह से बीच में पढ़ाई छोड़नी पड़ी, उनके लिए अब अपनी मातृभाषा में पढ़ाई आसान होने जा रही है। केंद्र सरकार के नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत डोगरी में आसान किताब तैयार की जा रही है। इसकी मदद से वे पढ़ना-लिखना सीखने के साथ गिनती और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी जरूरी बातें भी आसानी से समझ सकेंगे।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के राज्य साक्षरता केंद्र की ओर से तैयार की जा रही इस किताब को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही है। भाषा को सरल, सहज और स्थानीय बोली के अनुरूप रखने के लिए डोगरी भाषा के विशेषज्ञों और शिक्षकों से सुझाव लिए गए हैं। इससे पहली बार पढ़ाई शुरू करने वाले लोगों के लिए सीखना आसान होगा।
यह किताब सिर्फ अक्षर पहचानने और पढ़ना-लिखना सिखाने तक सीमित नहीं रहेगी। इसमें बुनियादी गिनती, स्वास्थ्य, स्वच्छता, बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, सरकारी योजनाओं की जानकारी और रोजमर्रा की जिंदगी में काम आने वाली दूसरी जरूरी बातें भी आसान भाषा में शामिल होंगी। उद्देश्य लोगों को इतना सक्षम बनाना है कि वे अपने छोटे-छोटे काम खुद कर सकें और जरूरी जानकारी के लिए दूसरों पर निर्भर न रहें।
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डोगरी में पढ़ाई से बढ़ेगा आत्मविश्वास, झिझक कम होगी
कार्यक्रम की समन्वयक डॉ. सुषमा रानी ने बताया कि डोगरी में तैयार यह किताब लोगों को अपनी मातृभाषा में सीखने का अवसर देगी। इससे पढ़ाई की शुरुआत आसान होगी, सीखने में झिझक कम होगी और वयस्क साक्षरता अभियान को भी मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर किताब में जरूरी बदलाव किए जा रहे हैं। समीक्षा के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद प्रतियां छापी जाएंगी और चरणबद्ध तरीके से साक्षरता केंद्रों में उपलब्ध कराई जाएंगी।
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पांच साल का राष्ट्रीय साक्षरता अभियान
केंद्र सरकार ने नई शिक्षा नीति-2020 के तहत वर्ष 2022 में नव भारत साक्षरता कार्यक्रम शुरू किया। यह अभियान 2026-27 तक चलेगा। इसका लक्ष्य 15 साल या उससे अधिक उम्र के उन लोगों को साक्षर बनाना है, जो कभी स्कूल नहीं जा सके या औपचारिक पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए। पढ़ना-लिखना और गिनती सिखाने के साथ इस अभियान में जीवन कौशल, बुनियादी शिक्षा, रोजगार से जुड़े कौशल और निरंतर सीखने पर भी जोर दिया जा रहा है।
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