- रेनू ने 31 साल बाद दोबारा शुरू की पढ़ाई, सुनने-बोलने में 70% परेशानी के बावजूद नहीं मानी हार
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। सपने पूरे करने की कोई उम्र नहीं होती। हौसला हो तो मुश्किल रास्ता भी आसान हो जाता है। जानीपुर की रेनू हंस ने 45 साल की उम्र में ऐसा ही कर दिखाया है। सुनने और बोलने में परेशानी के बावजूद उन्होंने 31 साल बाद दोबारा किताबें उठाईं और 82 प्रतिशत अंक से दसवीं कक्षा पास की।
रेनू हंस के बेटे नमन कौल ने बताया की मां ने वर्ष 2025 में जम्मू-कश्मीर स्टेट ओपन स्कूलिंग से दोबारा पढ़ाई शुरू की। इस वर्ष में घोषित परीक्षा परिणाम में उन्होंने 500 में से 406 अंक हासिल किए। उनके विषयों में हिंदी, अंग्रेजी, सामाजिक अध्ययन, गृह विज्ञान और पेंटिंग शामिल रहे। खास बात है कि जिस उम्र में आमतौर पर लोग पढ़ाई छोड़कर परिवार और दूसरी जिम्मेदारियों में व्यस्त हो जाते हैं, उस उम्र में रेनू ने अधूरे सपने को फिर से जिंदा किया।
रेनू ने 14 वर्ष की आयु में पढ़ाई छोड़ दी थी। इसके बाद शादी हुई और परिवार की जिम्मेदारियां भी उनके हिस्से आईं। जिंदगी आगे बढ़ती रही, लेकिन पढ़ाई और नौकरी का सपना उनके मन में कहीं न कहीं बना रहा। कोरोना काल में उन्हें इस सपने को पूरा करने की फिर से प्रेरणा मिली। नमन के मुताबिक मां की कुछ सहेलियों ने पीएम पैकेज के तहत नौकरी पाई थी। तब मां ने भी मन में सोचा कि अगर वह पढ़ाई पूरी कर लें तो शायद अपने पैरों पर खड़ा होने का सपना पूरा कर सकती हैं।
बेटे ने मां को पढ़ाया, अब आगे की तैयारी में जुटीं
रेनू के इस सफर में बेटे नमन ने अहम भूमिका निभाई। नमन खुद 12वीं की पढ़ाई कर रहे हैं। पढ़ाई के दौरान मां-बेटे ने मिलकर मेहनत की। नमन ने बताया कि बचपन से ही मां को सुनने और बोलने में करीब 70 प्रतिशत परेशानी है। इसके बावजूद उन्होंने कभी अपनी शारीरिक परेशानी को सपनों के रास्ते में नहीं आने दिया। अब रेनू 12वीं कक्षा की तैयारी में जुट गई हैं।
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परिवार की मुश्किलें भी नहीं बनीं रुकावट
रेनू के पति बबलू कौल भी पूरी तरह सुन और बोल नहीं पाते हैं और टेलर का काम करते हैं। परिवार की अपनी जिम्मेदारियां और परेशानियां थीं, लेकिन रेनू ने पढ़ाई को बीच में नहीं छोड़ा। 45 साल की उम्र में परीक्षा देना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन परिवार के सहयोग और मजबूत इरादे के दम पर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया।