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प्रबंधन शिक्षा में कला का मेल जरूरी, सोच और संवेदना को करती है मजबूत : उपराज्यपाल

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- आईआईएम में अंतरराष्ट्रीय चित्रकार संगोष्ठी का समापन, प्रदर्शनी का उद्घाटन
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- देश-विदेश के चित्रकारों और छात्रों की सैकड़ों कृतियां प्रदर्शित






जम्मू। कला केवल चित्रों तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह सोचने, समझने और समाज से जुड़ने की क्षमता को मजबूत करती है। प्रबंधन शिक्षा के साथ कला का जुड़ाव विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में अहम भूमिका निभाता है। यह बातें उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भारतीय प्रबंधन संस्थान ( आईआईएम) में आयोजित अंतरराष्ट्रीय चित्रकार संगोष्ठी के समापन और चित्रों की प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कही।





संगोष्ठी 12 से 16 जनवरी तक चली। प्रदर्शनी में 21 अंतरराष्ट्रीय चित्रकारों, 25 उभरते कलाकारों और 90 छात्र कलाकारों की कृतियां प्रदर्शित की गईं। इनमें विभिन्न देशों की कला परंपराएं, समकालीन विषय और सांस्कृतिक विविधता साफ दिखाई दी। समापन समारोह को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि आज के समय में रचनात्मकता और जिज्ञासा बहुत जरूरी हो गई है।
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प्रबंधन और चित्रकला दोनों में दूरदृष्टि, निरंतर सीखने की भावना और गलतियों से अनुभव लेने की जरूरत होती है। उन्होंने संस्थान की पहल की सराहना की। एम्स जम्मू के पूर्व निदेशक प्रोफेसर शक्ति गुप्ता ने कहा कि ऐसे आयोजन छात्रों की रचनात्मक क्षमता को निखारते हैं। इस दौरान निदेशक प्रोफेसर बीएस सहाय और संयोजक चित्रकार केके गांधी मौजूद रहे। समारोह के दौरान उपराज्यपाल ने वरिष्ठ चित्रकारों को सम्मानित किया। सभी अंतरराष्ट्रीय और उभरते कलाकारों को प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह भी प्रदान किए गए।


डिग्री बांटने वाले नहीं, समाज की जरूरतों के साथ चलें विश्वविद्यालय

जम्मू विश्वविद्यालय की अकादमिक काउंसिल की बैठक में शुक्रवार को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री बांटने का केंद्र न बनें वे समाज की जरूरतों के साथ चलें। विश्वविद्यालयों को नवाचार, कौशल विकास और समाज की समस्याओं के समाधान का केंद्र बनना होगा।
एलजी ने कहा कि ये नया दौर है जिसमें पढ़ाई को जमीन से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने शिक्षण संस्थानों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार होने का आह्वान किया है। पाठ्यक्रमों की समय-समय पर समीक्षा हो और इन्हें आधुनिक दौर की जरूरतों के अनुरूप बनाने पर काम हो। छात्रों को सीधे रोजगार से जोड़ने के लिए विश्वविद्यालय बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाएं।
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मनोज सिन्हा ने कहा कि शोध का मुख्य उद्देश्य स्थानीय समस्याओं का समाधान होना चाहिए विशेषकर प्राकृतिक आपदाओं की पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करने पर काम हो। बैठक में सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े पाठ्यक्रम के नाम में बदलाव करने का भी फैसला लिया गया। उन्होंने कौशल विकास पाठ्यक्रमों के प्रभावी मूल्यांकन भी हो।
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