अखनूर। कोरोना की तीसरी लहर धीमी पड़ने पर सरकार द्वारा नौवीं कक्षा के ऊपर स्कूल और कॉलेज खोलने के आदेश पर सोमवार को क्षेत्र के सभी शिक्षण संस्थान खुल गए। छात्रों की पढ़ाई शुरू हो गई। हालांकि कुछ छात्रों को स्कूल और कॉलेज खुलने की समय पर जानकारी नहीं मिलने पर वह नहीं पहुंच पाए। छात्रों की उपस्थिति तीस प्रतिशत के आसपास ही रही। छात्रों का कहना है कि कोविड से पढ़ाई का काफी नुकसान हुआ है। अब पढ़ाई शुरू हुई है।
छात्रों का कहना है कुछ छात्रों को शिक्षण संस्थान खुलने की समय पर जानकारी नहीं मिलने पर वह नहीं आ सके। नौवीं से नीचे कक्षा के छात्रों को स्कूल की तरफ से मैसेज मिल रहा है, जिसमें 21 फरवरी को स्कूल आने की सूचना दी गई है। संवाद
दो साल बाद स्कूल में लौटी रौनक
आरएस पुरा/ मीरां साहिब। लगभग दो वर्ष बाद सोमवार को फिर से स्कूल खुले। वहीं बच्चों के चेेहरों पर चमक दिखी। कोरोना के मामलों में गिरावट देखे जाने के बाद सरकार ने यह फैसला लिया है।
फिलहाल 9 10, 11, 12 तक के कक्षाओं को खोलने की अनुमति मिली है। साथ ही साथ डिग्री कॉलेज भी कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए खोले जाने के निर्देश हैं। कोरोना को देखते हुए व्यवस्थाओं में कई बदलाव किए गए हैं। इस कड़ी में सोमवार को छात्र स्कूल समय से पहुंचे। छात्रों की थर्मल स्क्रीनिंग की गई। हाथों के साथ-साथ स्कूल बैग को भी सैनिटाइज किया गया। इसके बाद प्रवेश दिया गया। कान्वेंट स्कूल में प्रवेश से पहले छात्रों की थर्मल स्क्रीनिंग की गई। सभी छात्र स्कूल में मास्क पहनकर आए। कोरोना संक्रमण की गाइड लाइन के अनुसार सोमवार को जब स्कूल खुले तो प्रार्थना सभा नहीं हुई। कक्षा में भी उचित दूरी में बच्चों को बैठाया गया। कई माह बाद स्कूल खुले तो छात्र खुश नजर आए। कई दिन से स्कूल को सैनिटाइज का काम चल रहा है। स्कूल परिसर में जगह-जगह सामाजिक दूरी को लेकर पोस्टर भी चस्पा हैं।
स्कूल पहुंच रहे विद्यार्थियों का कहना है कि उनको बेहद खुशी हो रही है कि फिर से स्कूल खुल गए हैं। कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए सभी छात्र आ रहे हैं। स्कूल में भी अच्छी व्यवस्था की गई है। हर पीरियड के बाद क्लास रूम को सैनिटाइज किया गया। बच्चों से यह पूछा भी जा रहा है कि अगर तबीयत सही नहीं लग रही है तो तुरंत इसकी सूचना क्लास टीचर को दें। छात्रों के चेहरे पर रौनक है और वह दुआ मांग रहे हैं कि अब कोरोना के मरीजों की संख्या में इजाफा न हो। स्कूल ऐसे ही खुले रहें।
दूसरी ओर सरकारी स्कूलों में भी गाइड लाइन का पालन करते हुए स्कूल खुले हैं। बिना मास्क के छात्र-छात्राओं को प्रवेश नहीं दिया गया। जबकि गेट पर ही थर्मल स्कैनिंग और सैनिटाइजेशन का काम भी किया जा रहा है। छात्र-छात्राओं के स्कूल आने से एक बार फिर से स्कूल में रौनक बढ़ गई है। वह प्रार्थना भी कर रही हैं कि कोरोना के मामले में इजाफ़ा न हो और जल्द ही प्राइमरी स्कूल की कक्षाओं को भी सरकार खोलने का आदेश पारित हो, ताकि छोटे बच्चे भी कक्षाओं में बैठ शिक्षा प्राप्त कर सकें।
स्कूल जाने में विद्यार्थियों में दिखा उत्साह
घगवाल। जैसे ही विद्यार्थियों ने स्कूलों खोलने की उपराज्यपाल का समाचार पत्रों में समाचार पढ़ा, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। दो साल से घर में बंद रहे विद्यार्थी ऊब चुके थे। मात्र पढ़ाई व अभिभावकों की डांट भी किसी गलती पर जरूर खाना पड़ती। सोमवार को खुले स्कूल में वह पूरे उत्साह के साथ पहुंचे।
उपराज्यपाल की घोषणा के बाद बच्चों में स्कूल जाने का उत्साह काफी है। क्योंकि कुछ बच्चे आगे की शिक्षा के लिए दूसरे स्कूलों में जाना चाहते हैं, जिसको लेकर वह उत्साहित भी हैं। इसी संदर्भ में रिया शर्मा ने बताया कि घर में रह कर वह काफी बोरियत महसूस कर रही थीं। जो सवाल वह स्कूल में जाकर समझ सकती हैं वह ऑनलाइन नहीं समझ सकतीं। सौरभ ने बताया कि उसने 9वीं कक्षा पास कर 11 वीं में पहुंचे हैं, लेकिन दो तीन दोस्तों से ही बात हो पाती है, लेकिन जब स्कूल जाएंगे तो सभी के साथ बैठ कर पढ़ाई करेंगे। स्कूल में खेलों का आनंद भी लेंगे। समीर शर्मा ने बताया कि वह 12वीं कक्षा का छात्र है। उसने 10वीं और 11वीं की पढ़ाई ऑनलाइन ही पास की। अब जैसे ही उपराज्यपाल की स्कूल खोलने की घोषणा का समाचार मिला तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। क्योंकि वह करीब दो वर्ष के बाद स्कूल जा रहे हैं। वहीं 8वीं की छात्रा निहारिका शर्मा ने बताया कि वह भी अपने स्कूल खुलने का इंतजार कर रही हैं।
परगवाल में पहले दिन स्कूल में नहीं पहुंचे बच्चे
परगवाल। कोरोना की स्थिति में हो रहे सुधार के मद्देनजर प्रशासन ने सोमवार से कक्षा नौ से ऊपर के सभी स्कूल कॉलेजों को सोमवार से खोलने का फैसला लिया। उसके बावजूद सीमा क्षेत्र परगवाल के हायर सेकेंडरी स्कूल में पहले दिन कोई भी छात्र स्कूल नहीं पहुंचा। हालांकि इससे पहले 9वीं से 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए सोमवार से स्कूल खोले जाने को लेकर काफी चर्चा रही। इसको लेकर अभिभावकों ने खुशी भी जताई थी। कुछ का कहना था कि वह एक दो दिन के अंदर अपने बच्चों को स्कूल भेजेंगे। हालांकि सरकार ने स्कूल में पहुंचने वाले बच्चों के लिए कुछ नियम और निर्देश जारी किए हैं। संवाद