एक लाख से अधिक वेस्ट पाक रिफ्यूजी पिछले 70 साल से अनुच्छेद 35-ए का दंश झेल रहे हैं। रियासत के इस विशेष दर्जे वाले अनुच्छेद की वजह से उन्हें अब तक न तो रियासत की नागरिकता मिल पाई है और न उन्हें यहां वोट देने का अधिकार है। उनके बच्चों को राज्य सरकार में नौकरी तक नहीं मिल सकती। विश्वविद्यालयों में बच्चों को पढ़ाने में भी दिक्कतें आ रही हैं, क्योंकि इनसे रियासत के मूल निवासी होने का प्रमाणपत्र यानी कि पीआरसी (परमानेंट रेजीडेंट सर्टिफिकेट) मांगा जाता है।
वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजियों को कठुआ से लेकर जम्मू संभाग के पलावालां सेक्टर तक बसाया गया है। सरकारी दस्तावेजों में ऐसे परिवारों की संख्या 5764 दर्ज है, जबकि वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजियों के मुताबिक हकीकत अलहदा है। उनका कहना है कि यहां 19,960 परिवार यानी एक लाख से अधिक रिफ्यूजी रह रहे हैं। सरकार की ओर से कभी भी रिफ्यूजियों की वास्तविक संख्या जानने की कोशिश नहीं की गई।
पीआरसी न होने की वजह से वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजी न तो विधानसभा चुनाव और न ही पंचायत या निकाय चुनाव में हिस्सेदारी कर सकते हैं। न तो यह चुनाव लड़ सकते हैं और न ही वोट डाल सकते हैं। यह जरूर है कि लोकसभा चुनाव में इन्हें वोट डालने का अधिकार है। वह लोकसभा का चुनाव भी लड़ सकते हैं।
नागरिकता के लिए पिछले कई साल से रिफ्यूजी संघर्ष कर रहे हैं। मोदी सरकार में भी इन्होंने कई बार आवाज बुलंद की। इसके बाद ऐसे रिफ्यूजियों का पहचान पत्र बनाया गया। यह पहचान पत्र केवल पैरा मिलिट्री फोर्स, सेना तथा नौ सेना में नियुक्ति के लिए ही काम आ सकता है। केंद्र सरकार के अन्य विभागों की नियुक्ति में इस पहचान पत्र से कोई लाभ मिलने वाला नहीं है। सभी विभागों की नियुक्तियों में पहचान पत्र को वैध दस्तावेज माने जाने को लेकर अब वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजियों ने आवाज बुलंद की है।
जन्म यहां पर अधिकार नहीं
वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजी एक्शन कमेटी 1947 के अध्यक्ष लब्बा राम गांधी का कहना है कि अनुच्छेद 35-ए ने बेड़ा गर्क कर रखा है। कई रिफ्यूजियों का जन्म यहीं हुआ है, लेकिन उन्हें कोई अधिकार नहीं है। बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो गया है। न तो उन्हें शिक्षा का माहौल मिल पा रहा है और न ही रोजगार के साधन सुलभ हो रहे हैं। उनका कहना है कि यदि 35-ए समाप्त हुआ तो वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजियों को नई जिंदगी मिलेगी। कुछ लोग बांग्लादेशियों व रोहिंग्याओं की तरह जिनके पास स्टेट सब्जेक्ट नहीं है उन्हें रियासत से बाहर निकालने की मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें यह समझना चाहिए कि रिफ्यूजियों ने यहीं जन्म लिया है। बांग्लादेशी व रोहिंग्या यहां पैदा नहीं हुए हैं।