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वायुसेना स्टेशन पर हमले में 25 किलोमीटर रेंज वाले ड्रोन के इस्तेमाल होने का शक

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जम्मू। सतवारी के वायुसेना स्टेशन पर हुए ड्रोन हमले की जांच में कुछ अहम सुराग मिले हैं। एयरफोर्स की तरफ से दर्ज कराए मुकदमे में कहा गया है कि हमला ड्रोन से ही किया गया। सूत्रों ने बताया कि इस हमले में 25 किलोमीटर तक उड़ने वाले चाइनीज ड्रोन का इस्तेमाल किया जाना प्रतीत होता है। इसका वजन भी 25 किलो के आसपास होता है। यह कम से कम 5 किलो तक विस्फोटक पेलोड कर सकता है। इन सभी पहलुओं की एनआईए जांच कर रही है।
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सोमवार को एनआईए की टीम ने पूरे घटनास्थल की दोबारा जांच की है। पुलिस, एनआईए और एयरफोर्स की स्पेशल जांच टीम ने मिलकर कर घटनास्थल पर सीन दोहराया। जांच टीम कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं पर जांच कर रही है। जैसा कि इस्तेमाल किया गया ड्रोन कितनी दूरी से आया होगा और इसमें कितना पेलोड हो सकता है। जिस जगह पर धमाका हुआ है। वहां से धमाके के कुछ अंश उठाए गए हैं। इनकी जांच से लगता है कि धमाके में शामिल इस तरह का विस्फोटक 5 से 10 किलो तक हो सकता है। जम्मू-कश्मीर पुलिस से जुड़े कुछ सूत्रों का कहना है कि इस तरह के ड्रोन इतना वजन उठाने में सक्षम हैं।
ड्रोन की दूरी का पता लगाने में जुटे
नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) ने उस पूरे क्षेत्र को सील कर दिया है, जहां पर धमाके हुए। एनएसजी का बम निरोधक दस्ता भी सोमवार को मौके पर पहुंचा और सबूत जुटाए। टीम इस पहलु पर जोर देकर पूछताछ कर रही है कि आखिर ड्रोन कितनी दूरी से आया होगा और वापस कहां गया। एयरफोर्स की स्पेशल जांच टीम भी इसी पहलू को लेकर जांच कर रही है।
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घायल जवानों ने देखी थी लाल रोशनी
इस हमले में दो जवान मामूली रूप से घायल हुए थे। जांच टीमों ने इनके बयान भी दर्ज किए हैं। घायल जवानों ने अपने बयान में बताया है कि हमले के वक्त उन्होंने आसमान पर एक लाल रंग की रोशनी को टिमटिमाते हुए देखा था। इसके बाद अचानक से वहां से विस्फोट हो गया था। अफरातफरी मची और पता नहीं लगा कि क्या हुआ।
पाकिस्तान से आए और बेलीचराना से लांच?
जांच एजेंसियां इस पहलू पर भी जांच कर रही हैं कि यह ड्रोन पाकिस्तान से आए और इनको लांच एयरफोर्स स्टेशन के आसपास से कहीं गया गया। एयरफोर्स स्टेशन के आसपास के सबसे संदिग्ध इलाकों में बेलीचराना मुख्य रूप से शामिल है। बेलीचराना में रविवार को शाम पुलिस ने कई जगहों पर तलाशी ली और कई लोगों के बयान भी रिकार्ड किए। ऐसा भी संभव हो सकता है कि पाकिस्तान से आए ड्रोन को बार्डर के पास कहीं रिसीव किया हो और इनको आसपास से कहीं से लांच किया गया हो। हालांकि यह तमाम अभी जांच का विषय है।
हमले में कौन सा विस्फोटक इस्तेमाल किया गया
जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि हमले में किस तरह का विस्फोटक इस्तेमाल किया गया है। आरडीएक्स और आईईडी के अलावा ग्रेेनेड अटैक भी इसमें शमिल हो सकता है। क्योकि जिस तरह से इमारत की छत उड़ी है। उससे यहीं अंदाजा लगाया जा सकता है कि धमाके में शामिल सामग्री ज्यादा क्षमता की नहीं थी, लेकिन कम भी नहीं थी। एक मोर्टार के गोले जितनी मार विस्फोटक आराम से कर सकता है।
पूरे इलाके में तलाशी अभियान, 100 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज ली
वायुसेना के स्टेशन पर हमले की जांच पुलिस ने भी अपने स्तर पर तेज कर दी है। सोमवार को पुलिस ने सतवारी के आसपास के घरों की तलाशी ली। 100 से अधिक लोकेशन की सीसीटीवी फुटेज ली और 50 से ज्यादा लोगों के बयान लेकर उनसे पूछताछ की। एसएसपी जम्मू ने खुद निजी तौर पर कई लोगों से पूछताछ की। उधर, शहर के बठिंडी से पकड़े गए लश्कर के आतंकी से मिले आईईडी मामले की जांच भी इस हमले से जोड़कर की जा रही है। एसएसपी जम्मू चंदन कोहली का कहना है कि मामले में काफी लोगों से पूछताछ की जा रही है। बठिंडी में पकड़े गए आतंकी से भी पूछताछ जारी है। यह पूछने पर कि क्या उक्त आतंकी का वायुसेना पर हुए हमले में कोई हाथ है, तो इस पर उन्होंने कहा कि अभी कुछ कह नहीं सकते। इससे इंकार नहीं किया जा सकता। पूछताछ की जा रही है। जल्द ही जांच किसी नतीजे पर पहुंचेगी। वहीं सोमवार को पुलिस और सेना ने मिलकर एयरपोर्ट के आसपास कई क्षेत्रों में तलाशी अभियान चलाया। कई लोगों से पूछताछ की गई और जांच के जरूरी सबूत जुटाए।
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