वीरवार को अखनूर क्षेत्र में बम्बारी के बाद जंग की आशंका के चलते महीने का राशन लेकर जाते राकेश क
अखनूर। सीमावर्ती क्षेत्र में आठ मई की रात पाकिस्तान की ओर से दर्जनों ड्रोन भेजे गए, जिन्हें भारतीय सेना ने आसमान में ही नष्ट कर दिया। इस त्वरित और प्रभावशाली कार्रवाई से दुश्मन की साजिश नाकाम हो गई।
रात करीब आठ बजे जब बाजार बंद हो रहे थे, तभी अचानक सायरन की आवाज से सभी सकते में आ गए। कुछ देर में ही आसमान में सफेद और लाल रोशनी की लकीरें दिखाई देने लगीं, जो बाद में धमाकों में बदल गईं। यह दृश्य स्थानीय निवासियों के लिए हैरान करने वाला था। रात 8:30 से 11:30 बजे तक रुक-रुक कर धमाके होते रहे। हालांकि भारतीय सेना की तत्परता से किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। लोग अपने-अपने घर में सुरक्षित स्थानों पर बैठे रहे। इस दौरान महिलाओं और बच्चों को परिवार के अन्य सदस्यों ने सुरक्षित होने का भरोसा दिलाया। सुबह करीब 4:30 बजे एक बार फिर से धमाके सुनाई दिए। इसके बाद हालात सामान्य होने लगे।
नाईवाला कैंप, जहां 1965, 1971 व 1999 के युद्ध में विस्थापित हुए लोगों को प्लॉट आवंटित किए गए थे, वहां भी एक ड्रोन को सेना ने मार गिराया। इसके कुछ अंश स्थानीय निवासी चमन लाल के बाथरूम पर गिरे। इससे मामूली नुकसान हुआ। चमन लाल छंब के सिंगरी गांव से विस्थापित होकर यहां बसे हैं।
जमोटियां क्षेत्र में भी एक पाकिस्तानी ड्रोन को ऊपर ही नष्ट कर दिया गया। इसके अवशेष जंगल में पाए गए। पुलिस ने नाईवाला और जमोटियां दोनों स्थानों से ड्रोन के अवशेष बरामद किए हैं। इसके अलावा अखनूर के दूधाधारी मंदिर के पीछे एक घर की खिड़कियों को भी ड्रोन के टुकड़ों से नुकसान पहुंचा है। हालांकि कोई घायल नहीं हुआ है।
वीरवार को अखनूर क्षेत्र में बम्बारी के बाद जंग की आशंका के चलते महीने का राशन लेकर जाते राकेश क