जम्मू। जम्मू विश्वविद्यालय के ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह हॉल में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कालजयी काव्य कृति रश्मिरथी पर काव्य नाटिका का मंचन किया गया। इसमें डिजाइन योर डिग्री प्रोग्राम के छात्रों ने काव्य नाटिका का बेहतरीन प्रस्तुतीकरण पेश किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और विशेष अतिथि नार्दर्न कमांड के मेजर जनरल संजीव कुमार उपस्थिति रहे
काव्य नाटिका रश्मिरथी में कलाकारों ने अपनी बेहतरीन रंगमंचीय प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया। महाभारत में वीर अर्जुन व दानी कर्ण के बीच हो रहे युद्ध में किस तरह धर्म व अधर्म की राह पर चल रहे दो वीरों के बीच संवाद को दर्शाया गया। यह दृश्य देखने लायक था।
युद्ध भूमि में आने से पहले हस्तिनापुर के युवराज दुर्योधन व कर्ण के साथ ही सभा में भगवान श्रीकृष्ण सहित पांडव बैठे हैं। द्रौपदी का स्वयंवर हो रहा है, लेकिन क्योंकि दानी कर्ण किसी राज्य के राजा नहीं हैं। ऐसे में मित्र का धर्म निभाते हुए दुर्योधन ने अंग प्रदेश का राजा बनाए जाने की घोषणा कर उसके सिर पर मुकुट रख दिया।
कलाकारों ने काव्य मंचीय प्रस्तुति के माध्यम से दिल को छू देने वाला अभिनय प्रस्तुत कर तालियां बटोरीं। पांडवों की तरफ से भगवान श्रीकृष्ण युद्ध न हो, इसके लिए संधि का प्रस्ताव भी लेकर गए, लेकिन दुर्योधन नहीं माना। ठीक ही कहा गया है कि जब नाश मनुज पर छाता है तब विवेक पहले मर जाता है।
अंत में कुरुक्षेत्र के मैदान में दो वीरों की भयंकर लड़ाई से आसमान व धरती व पाताल लोक कांप उठे। युद्ध के बीच सर्पराज अश्वसेन ने भी अपनी शत्रुता का जिक्र करते हुए दानी कर्ण की सहायता का प्रस्ताव रखा लेकिन कर्ण ने युद्ध नीति, धर्म नीति समझाकर उसकी सहायता लेने से इंकार कर दिया। बाद में युद्ध के मैदान में धनुर्धारी अर्जुन ने रथ का पहिया जमीन में धंसने के बाद भगवान कृष्ण की तरफ से युद्ध नीति, धर्म नीति का ज्ञान प्राप्त कर दानी कर्ण को मारने में सफलता प्राप्त कर ली।
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की काव्य कृति रश्मिरथी के मंचन का निर्देशन सुमित शर्मा ने किया। इसमें बेहतरीन संगीत सूरज सिंह सहित कलाकारों सुनील सिंह, आकाश गुप्ता व नृत्य निर्देशन आकाश डोगरा व नितिका अग्रवाल का रहा। इस अवसर पर प्रमुख रूप से उपराज्यपाल के प्रमुख सचिव डा. मंदीप कुमार भंडारी, विशेष अतिथि के तौर पर नार्दर्न कमांड के मेजर जनरल संजीव कुमार, कुलपति उमेश राय आदि मौजूद थे।