अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने दहेज प्रताड़ना के एक मामले में दर्ज एफआईआर और चार्जशीट को रद्द कर दिया है।
अदालत ने कहा कि यह मामला पहली नजर में महिला के पिता जो सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी हैं, के दबाव में दर्ज हुआ लगता है। पुलिस ने महज पांच दिन में चार्जशीट दाखिल कर दी जो असामान्य रूप से तेज कार्रवाई है और पूरे मामले को संदिग्ध बनाती है।
मामला उधमपुर महिला थाने में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है। यह एफआईआर पांच नवंबर 2024 को दर्ज हुई थी। इसमें महिला ने कहा था कि उसकी शादी 26 नवंबर 2023 को हुई थी। विवाह के डेढ़ महीने बाद ही उसके पति और ससुरालवालों ने उसे गर्भधारण न कर पाने के बहाने तलाक की बात कही और दहेज में एलसीडी, मोटरसाइकिल और सोने के गहने मांगे। महिला ने आरोप लगाया कि 19 मार्च 2024 की रात 11:30 बजे उसे पीटा गया, गाली-गलौज कर घर से निकाल दिया गया और बाद में घर लौटने नहीं दिया गया।
अदालत ने पाया कि महिला के आरोप सामान्य और अस्पष्ट थे। शुरुआती शिकायत और बाद में दर्ज बयान आपस में मेल नहीं खाते। घरेलू हिंसा कानून के तहत पहले दायर की गई शिकायत में कहीं भी दहेज मांगने का जिक्र नहीं था जबकि बाद की एफआईआर में दहेज प्रताड़ना के आरोप जोड़ दिए गए।
अदालत ने कहा कि महिला के पिता ने थाने में एफआईआर दर्ज कराने के लिए एसपी उधमपुर को पत्र लिखा था। पहले तो थाने का एसएचओ सात महीने पुराने मामले में एफआईआर दर्ज करने से हिचक रहा था लेकिन एसपी के निर्देश के बाद मामला दर्ज हुआ और सिर्फ पांच दिन में चार्जशीट दाखिल कर दी गई।
अदालत ने माना कि यह मामला दुर्भावनापूर्ण प्रतीत होता है और न्याय व्यवस्था के दुरुपयोग के समान है। न्यायमूर्ति राजेश सेखरी की पीठ ने कहा कि आरोपियों की यह दलील कि मामला दबाव में दर्ज हुआ, इसे पुलिस या महिला पक्ष ने नकारा नहीं। हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह के सामान्य और विरोधाभासी आरोप किसी अपराध का संकेत नहीं देते। इसलिए एफआईआर, चार्जशीट और संज्ञान आदेश को रद्द किया जाता है।